फलहारी बाबा अलवर से जयपुर खुली जेल में शिफ्ट:हाई कोर्ट के आदेश पर किया गया शिफ्ट, उम्रकैद की काट रहा है सजा, आश्रम में किया था दुष्कर्म

रेप के आरोप में उम्रकैद की सजा काट रहा फलाहारी बाबा को जयपुर की खुली जेल में शिफ्ट कर दिया गया है। हाईकोर्ट ने फलहारी बाबा की याचिका पर उसे खुली जेल मे शिफ्ट करने का आदेश दिया था। इसके बाद फलहारी बाबा को अलवर सेन्ट्रल जेल से खुली जेल में शिफ्ट कर दिया गया है। इससे पहले अप्रैल में हाईकोर्ट ने फलहारी को 20 दिन की पैरोल भी दी थी। याचिकाकर्ता के वकील विश्राम प्रजापति ने बताया कि ओपन एयर कैंप समिति ने फलहारी बाबा का प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया था। इसकी हाईकोर्ट में अपील की गई थी। हाई कोर्ट ने ओपन एयर कैंप समिति के आदेश को रद्द करते हुए फलहारी को ओपन जेल में शिफ्ट करने के आदेश दिए। अलवर सेन्ट्रल जेल प्रशासन ने इसकी पालना नहीं की। इसके बाद हमने अदालत में अवमानना याचिका दायर की। इस पर हाईकोर्ट ने प्रशासन को अवमानना नोटिस जारी किए। इसके बाद याचिकाकर्ता को ओपन जेल में शिफ्ट किया गया। युवती से रेप का दोषी है बाबा
फलाहारी बाबा पर उड़ीसा में रहने वाली एक युवती ने अलवर के आश्रम में रेप करने का आरोप लगाया था। जिस पर पुलिस ने फलाहारी बाबा को 23 सितंबर 2017 को गिरफ्तार किया था। उसके बाद से ही फलाहारी बाबा जेल में बंद हैं। ट्रायल के बाद कोर्ट ने 26 सितम्बर 2018 को फलहारी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। पैरोल पर सुनवाई के दौरान फलाहारी के वकील विश्राम प्रजापति ने कहा- आरोपी पिछले 7 साल से जेल में बंद हैं। सोशल वेलफेयर विभाग ने भी याचिकाकर्ता के पक्ष में रिपोर्ट दी है। वहीं अलवर सेंट्रल जेल के अधीक्षक की रिपोर्ट भी याचिकाकर्ता को लेकर संतोषप्रद है, लेकिन केवल जिला पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर याचिकाकर्ता को पैरोल नहीं दी गई। वहीं सरकारी वकील ने पैरोल का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी एक गंभीर मामले में सजा भुगत रहा हैं। इसके बाहर आने से समाज पर गलत असर पड़ेगा। ये भी पढ़ें ​​​​​​​फलाहारी बाबा को हाईकोर्ट से मिली 20 दिन की पैरोल:उम्रकैद की काट रहा था सजा, 7 साल पहले आश्रम में युवती से किया था रेप दुष्कर्म के आरोप में उम्रकैद की सजा काट रहा स्वामी कौशलेंद्र प्रपन्नाचारी यानि फलाहारी बाबा करीब 7 साल बाद अब जेल से बाहर आ सकेगा। राजस्थान हाईकोर्ट ने फलाहारी बाबा को 20 दिन की पैरोल पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस आशुतोष कुमार की खंडपीठ फलहारी बाबा की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिए थे। (पूरी खबर पढ़ें)

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