भास्कर न्यूज| चाईबासा चाईबासा में मुस्लिम समुदाय द्वारा शुक्रवार को अल्लाह के आखिरी पैगंबर, हजरत मोहम्मद का जन्म श्रद्धा, आदर और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पैगंबर की शिक्षा को अपनी जिंदगी में उतारने का संकल्प लिया गया। इस अवसर पर मुस्लिम बस्तियों में उत्साह का माहौल रहा। शुक्रवार को सुबह से ही मुस्लिम बस्तियों में ईद मिलादुन्नबी पर मस्जिदों और मोहल्लों में जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया। घरों, गलियों और मस्जिदों को रोशनी व धार्मिक झंडों से सजाया गया था। उलेमा और विद्वानों द्वारा तकरीर (भाषण) के जरिए हजरत मोहम्मद (स.) की जीवनी और उनकी शिक्षा पर रोशनी डाली गई। सामाजिक और धार्मिक संस्थाएं गरीबों और जरूरतमंदों में खाना, कपड़े और मिठाई बांटी गई। रजा- ए-मदीना मस्जिद कमेटी का जुलूस 1998, लगभग 27 सालों से निकाला जाता रहा है। इस साल शुक्रवार को मोहम्मदिया जुलूस सुबह 8 बजे से अपराह्न 1 बजे तक रहा। जुलूस मदीना मस्जिद से सुबह निकला जो बड़ी बाजार के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों से होते हुए यशोदा टॉकीज चौक, शहीद पार्क होते हुए सदर थाना के पास पहुंचकर पुनः उसी मार्ग से उर्दू लाइब्रेरी, चाईबासा लौटा जहां सामूहिक दुआ के बाद जुलूस का समापन किया गया। मोहम्मदिया जुलूस के आगे-आगे दो घोड़े पर बच्चे सवार थे, उसके पीछे अलग-अलग बस्तियों के बच्चे, बुजुर्ग व जवान हाथों में धार्मिक झंडा लिए धार्मिक नारे लगाते चल रहे थे। मोहम्मदिया जुलूस को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए मुस्लिम बस्तियों सहित जुलूस मार्ग पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी। मौके पर मोहम्मद अख्तर आलम, मीर जहांगीर, मोहम्मद राज, मोहम्मद जानिसार, मोहम्मद आलम, मोहम्मद नसीम, मोहम्मद जाहिर, मोहम्मद नियाज समेत काफी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल थे।


