पालतू और निराश्रित गो-भैंस वंश पशुओं की अलग-अलग कलर टैगिंग की जाएगी। ऐसा इसलिए, ताकि देखते ही उनकी अलग पहचान की जा सके। इसके लिए मप्र पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर नए कलर टैग मांगने की तैयारी की है। फिलहाल यह तय हुआ है कि पालतु पशुओं के लिए पीले रंग का टैग लगाया जाएगा। ऐसा इसलिए,क्योंकि मप्र के करीब तीन करोड़ पशुओं को इसी रंग का टैग पहले ही लगाया जा चुका है। निराश्रित पशुओं के टैग के रंग का चुनाव बाकी है। इसके लिए मंगलवार को पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने विभाग के अफसरों को निर्देश दिए थे। प्रदेश में 4.06 करोड़ पशुओं की आबादी है, जिनमें हर एक लाख पशुओं पर एक वाहन (कॉल सेंटर 1962) संचालित है। इन 4.06 करोड़ में से करीब 9 लाख पशु निराश्रित हैँ। नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) टैगिंग के लिए 12 डिजिट का नंबर जनरेट करता है। जिनकी मौत, वो भी रजिस्टर्ड
नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड की ओर से दिया जाने वाला 12 डिजिट का नंबर हर पशु के लिए अलग होता है। फिलहाल मप्र में रजिस्टर्ड करीब तीन करोड़ गौ-भैंस वंश पशु हैं। इनमें बहुत से ऐसे भी हैं, जिनकी जान जा चुकी है। इसलिए विभाग स्तर पर ऐसे पशुओं की मार्किंग की भी कवायद की जा रही है, ताकि उन्हें दिया गया रजिस्ट्रेशन नंबर किसी और पशु पर लगाया जा सके।


