सतलुज, ब्यास, रावी समेत क्षेत्रीय नदी-नालों के पानी की बाढ़ से लाखों किसान बेहद परेशान हैं। फसलें चौपट होती देख वे खून के आंसू पी रहे हैं। इस नुकसान की भरपाई बहुत कठिन है। सरकारी प्रयास कितने रंग दिखाएंगे यह आने वाले दिन बताएंगे। फिलहाल तो उनके लिए पंजाब खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी, लुधियाना ने सितंबर मध्य से सितंबर अंत तक बोने के लिए आकस्मिक फसल योजना जारी की है, ताकि किसानों की कुछ मदद हो सके। इसमें जमीन के ऊपर, जड़ वाली और पत्तेदार सब्जियों के अतिरिक्त चारे वाली कुछेक फसलें शामिल हैं। उसने किसानों के लिए विभिन्न फसल विशेषज्ञों के संपर्क नंबर भी जारी किए हैं, ताकि समय पर उनसे मार्गदर्शन हासिल कर अपने नुकसान की कुछ भरपाई करना संभव हो सके। फिरोजपुर के धीरा घारा गांव में सतलुज की बाढ़ में डूबे खेत। फोटो : नरेश कुमार {पत्तागोभी : पत्तागोभी की मुख्य मौसमी किस्म पंजाब मगरी इस माह के मध्य से अंत तक बोई जा सकती है।


