भोपाल में अब महिला अपराधों में समझौता या फैसला होने के बाद भी एक साल तक पुलिस आरोपी पर नजर रखेगी। यह निर्देश राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने भोपाल पुलिस को दिए। साथ ही थानों और एसडीएम के यहां महिला संबंधी प्रकरणों में सप्ताह में एक दिन काउंसलर की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा इससे 50% मामले तुरंत हल हो जाएंगे। सुनवाई के दौरान कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने अध्यक्ष से जरूरी मीटिंग होने की बात कहते हुए जाने की अनुमति मांगी। इस पर अध्यक्ष ने कहा कि अभी तक कभी ऐसा नहीं हुआ कि बैठक में भोपाल संभागायुक्त और आईजी शामिल न हुए हों। हम भी बहुत दूर से आए हैं। मैं आपको जाने की अनुमति नहीं दूंगी। इसके बाद कलेक्टर नहीं गए। सुनवाई में गंभीर अपराध के 30 केस सुने गए। पहली बार शिविर भी लगा, जिसमें 24 महिलाओं ने शिकायत की। इनमें 4 गंभीर मामलों को मौके पर ही सुना गया। विजया ने कहा कि भोपाल में महिला जनसुनवाई शिविर के बाद अब देश भर में संभाग स्तर पर ऐसे शिविर लगाए जाएंगे। नाराजगी… कलेक्टर ने बीच में जाने की अनुमति मांगी, अध्यक्ष बोलीं- हम भी दूर से आए हैं, अनुमति नहीं दूंगी सुनवाई में पता चला- समझौता भी हो गया सुनवाई के दौरान पता चला कि कई मामलों में समझौता होने से महिला खुद ही शिकायत बंद कराना चाहती हैं। विजया ने कहा, विजया ने कहा कि अधिकांश मामलों में महिलाएं सामाजिक, बच्चों और अन्य कारणों से समझौता कर लेती हैं। यही मामले बाद में बड़े हो जाते हैं। ऐसे में एक साल तक पीड़ित को प्रताड़ित करने वाले पर नजर रखी जाए। इसका पता दोनों पक्षों को नहीं चलना चाहिए। जब लगे कि सब ठीक है, तो केस क्लोज कर दें। महिलाओं के मामलों में बहुत संवेदनशील रहने की जरूरत आयोग अध्यक्ष ने कहा, दहेज, रेप के केस गंभीरता से लें। महिलाओं के मामले में संवेदनशील होना जरूरी है। उन्होंने यह बात एक सेंटर में महिलाओं का शोषण किए जाने की शिकायत पर कही। उन्होंने कहा कि जब एक ही जगह की एक ही नाम से शिकायत हो रही है, तो उसकी सत्यता की जांच होना चाहिए। दो मामलों में बच्चे की कस्टडी पिता को दी सुनवाई के दौरान दो मामले सामने आए, जिसमें महिलाओं ने पति से बच्चे की कस्टडी मांगी। इसमें एक पुलिसकर्मी का भी मामला रहा। दोनों ही मामलों में पुलिस का तर्क था कि कोर्ट ने ही इन मामलों में पिता को बच्चों की कस्टडी दी है। अध्यक्ष विजया ने कहा कि कोर्ट के मामले में हम कुछ नहीं कर सकते हैं। वहीं से उसका निर्णय होगा। हां पुलिस आपकी दोबारा कोर्ट में आवेदन करने में मदद कर सकती है।


