रविवार रात को चंद्र ग्रहण दौरान सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद रहे। यह सूतक काल दोपहर साढ़े 12 बजे से लेकर रात्रि 9.57 बजे तक रहा। जबकि रात 9.57 से लेकर रात 1.26 बजे तक ग्रहण काल रहा। जिसमें मंदिरों में हरिनाम संकीर्तन किया गया। श्री दुर्ग्याणा तीर्थ के मुख्य श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में हरिनाम संकीर्तन किया गया। वहीं कई पंडितों ने ग्रहण के सूतक काल दौरान मंत्रोच्चारण करके सिद्धि प्राप्त की। शिवाला बाग भाइयां समेत माता लाल देवी मंदिर रानी का बाग, प्राचीन शिवाला एवं राम मंदिर रानी का बाग, बिजली पहलवान मंदिर, पंचरत्न श्री कृष्णा मंदिर, शिवाला गंगा राम समेत अन्य मंदिरों में रात 9.57 से लेकर 1.26 बजे तक भजन मंडलियों द्वारा प्रभु का संकीर्तन किया। ग्रहण के बाद कई लोगों ने दुर्ग्याणा तीर्थ के सरोवर में स्नान किया। वहीं ग्रहण के बाद मंदिरों के कपाट खोलकर भगवान को स्नान करवाकर सारा मंदिर परिसर की साफ-सफाई की गई। 7 कपूर 13


