बाढ़ प्रभावित इलाकों में गिरदावरी करने के न तो कोई आदेश जारी हुए हैं न ही इससे जुड़ा कोई काम शुरू किया गया है। इसके बावजूद सूचना विभाग से नोट जारी कर आम लोगों को गुमराह किया जा रहा कि गिरदावरी के कामों में तेजी लाई जाए। जमीनी हकीकत यह है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों के खेतों में पानी भरा हुआ है। जब तक पानी पूरी तरह से निकल नहीं जाता, गिरदावरी नहीं हो सकती। जिनके दस्तावेज बाढ़ में बह गए वह मुआवजे के लिए डिजिटल प्रमाण का उपयोग कर सकते हैं। वहीं बाढ़ के कारण मरने वालों की गिनती 7, जबकि पशुओं की 54 हो गई है। डीसी साक्षी साहनी ने अफसरों को निर्देश दिया है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में जलस्तर काफी कम हो गया है पीड़ितों को मुआवजा देने में तेजी लाई जाए। अफसर-कर्मचारी सभी पीड़ितों के घर तक पहुंचें और राहत सामग्री उपलब्ध कराएं। वहीं उन लोगों का विशिष्ट डेटा एकत्र करें जिनके घर गिर गए हैं। बाढ़ का पानी कम होने से बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। इसे देखते हुए सेहत विभाग को मेडिकल सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। आशा वर्कर घर-घर जाकर मच्छर भगाने वाली दवाइयां और सैनिटरी नैपकिन भी वितरित करेंगी। बाढ़ से जिले के रमदास, अजनाला और चौगावां ब्लॉक के करीब 170 सरकारी स्कूल बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। शुरुआती आकंलन के मुताबिक, इस आपदा से तकरीबन 54 करोड़ की संपत्ति का नुकसान हुआ है। कई स्कूलों की इमारतें अब इतनी जर्जर हो चुकी हैं कि उनकी दीवारों और छतों में दरारें आ गई हैं, जिससे ढहने का खतरा बना हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान हालात में इन स्कूलों में बच्चों को पढ़ाना असंभव है। शिक्षा विभाग के अनुसार 35 सीनियर सेकंडरी स्कूलों (कक्षा 6वीं से 12वीं) को लगभग 25 करोड़ का नुकसान हुआ है। 135 प्राइमरी व एलिमेंटरी स्कूलों को करीब 29 करोड़ का नुकसान हुआ है। सोमवार को स्कूल के अध्यापक स्कूलों में पहुंचे हैं, जिसके बाद स्थिति और क्लियर होगी क्योंकि 12 दिन से स्कूल बंद थे तो स्टाफ भी नहीं जा रहा था। भास्कर न्यूज | अमृतसर अजनाला के घोनेवाल और माछीवाल के साथ-साथ रमदास के पंडोरी, कतले, भगवानपुरा, मल्लकपुर, दूजेवाल, गग्गोमाहल, सूफियां, हरड़ कलां और हरड़ खुर्द जैसे गांव भी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। यहां खेतों में अब भी पानी भरा हुआ है और बदबू उठनी शुरू हो गई है। वहीं गंदगी और खड़े पानी में पनप रहे मच्छरों से बीमारियां फैलने का खतरा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में महामारी फैलने का खतरा है। ग्रामीणों का कहना है कि अब तक कई लोग बुखार और उल्टी-दस्त जैसी बीमारियों से परेशान हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द दवाई का छिड़काव और मेडिकल टीमें गांवों तक नहीं पहुंचीं, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। बता दें कि 26 अगस्त की रात को धुस्सी बांध टूटने के बाद अजनाला और रमदास क्षेत्र के गांवों में आज भी जिंदगी पटरी पर नहीं लौट पाई है। ब्लॉक अजनाला और चौगावां में कई स्कूल अभी तक पानी में डूबे हुए हैं और वहां पहुंचना भी संभव नहीं हो पाया है। वहीं दूसरी तरफ सोमवार को डीईओ (सीनियर सेकंडरी) राजेश शर्मा और डीईओ (एलिमेंटरी) कंवलजीत सिंह ने एक बैठक की। डीईओ कंवलजीत सिंह ने कहा कि 29 करोड़ का एस्टिमेट बनाकर सरकार को भेजा है। वहीं अजनाला और चौगांवा ब्लॉक को छोड़कर अमृतसर जिले के सभी सरकारी व प्राइवेट स्कूल और कॉलेज खोल दिए जाएंगे।


