रांची यूनिवर्सिटी (आरयू) का निरीक्षण करने वाली नैक पीयर टीम में एक ऐसे प्रोफेसर को शामिल कर लिया गया, जो इस साल खुद आरयू में पीएचडी वायवा के एक्सपर्ट थे। थिसिस मूल्यांकन और वायवा के लिए उन्हें यूनिवर्सिटी से पैसे भी मिले थे। जबकि नियम साफ है कि निरीक्षण में वही रह सकते हैं, जिनका तीन साल से संस्थान से कोई जुड़ाव न हो। राष्ट्रीय मूल्यांकन प्रत्यायण परिषद (नैक) की छह सदस्यीय टीम ने पांच से सात दिसंबर तक रांची यूनिवर्सिटी का निरीक्षण किया था। जनार्दन राय नागर विद्यापीठ राजस्थान के कुलपति कर्नल प्रो. शिव सिंह सारंगदेवोत के नेतृत्व वाली इस टीम में फकीर मोहन यूनिवर्सिटी ओडिशा के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर प्रो. अनिल कुमार महापात्रा भी शामिल थे। टीम में शामिल करने के दौरान उन्होंने यह जानकारी छिपा ली कि उनका आरयू से कोई संबंध रहा है। गौरतलब है कि आरयू के पीजी राजनीति विभाग के स्कॉलर मुकेश कुमार ने झारखंड में सर्व शिक्षा अभियान की वर्तमान िस्थति पर डॉ. श्वेता सिंह के मार्गदर्शन में रिसर्च पूरा किया था। थिसिस का मूल्यांकन और पीएचडी वायवा महापात्रा ने लिया था। क्या है नियम 14वां निर्देश… निरीक्षण से पहले पिछले तीन वर्षों की अवधि के दौरान संस्थान के साथ तरह का जुड़ाव नहीं होना चाहिए। यदि कोई ऐसा जुड़ाव है तो उसका विधिवत खुलासा किया जाना चाहिए और दौरा स्वीकार नहीं करना चाहिए। 16वां निर्देश… टीम के सदस्यों को ध्यान देना चाहिए कि संस्थान के मान्यता प्राप्त परिणामों की घोषणा के बाद एक वर्ष तक संस्थान में कोई भी भुगतान वाली असाइनमेंट स्वीकार करना नैक द्वारा हितों के टकराव के रूप में माना जाएगा। और इससे सख्ती से बचना चाहिए। एक और आरोप… प्रो. महापात्रा ने पीएचडी स्कॉलर से भी वसूले थे पैसे नैक टीम के चयन पर सवाल… ओडिशा के प्रो. अनिल महापात्रा ने आरयू में थिसिस का किया था मूल्यांकन सीधी बात: अनिल कुमार, प्रोफेसर आरयू के पीजी राजनीति विज्ञान विभाग में पीएचडी वायवा लेने के लिए आए एक्सपर्ट प्रो. अनिल कुमार महापात्रा ने नियम के विरुद्ध पीएचडी स्कॉलर से पैसे भी वसूले। उन्होंने प|ी के बैंक अकाउंट में यह राशि ऑनलाइन ली थी। इसका सबूत और वॉट्सएप चैट भी दैनिक भास्कर के पास है। प्रो. अनिल थिसिस मूल्यांकन और वायवा लेने के एवज में पैसे लेने के बाद भी पीयर टीम में कैसे शामिल हुए? -नैक की इस गाइडलाइन के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। रिसर्च स्कॉलर से प|ी के खाते में ऑनलाइन पैसे मंगाए थे? -ऐसी कोई बात नहीं है।


