झारखंड के विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने और पीएचडी रिसर्च करने की इच्छा रखने वाले अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रस्ताव के आलोक में झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) ने झारखंड पात्रता परीक्षा (जेट) पर 18 वर्षों से लगा ब्रेक हटा दिया है। इसके बाद जेपीएससी ने असिस्टेंट प्रोफेसर और पीएचडी करने के इच्छुक योग्य अभ्यर्थियों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। इसके लिए आवेदन जमा (रजिस्ट्रेशन) करने की प्रक्रिया 16 सितंबर से शुरू होगी। परीक्षा में सफल उम्मीदवार असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति और पीएचडी रिसर्च के लिए पात्र हो जाएंगे। परीक्षा में दो पेपर होंगे। कुल 300 अंकों की परीक्षा में पेपर-1 में 100 अंक के कुल 50 प्रश्न पूछे जाएंगे। इसमें रिसर्च एप्टीट्यूड, रीजनिंग एबिलिटी, रीडिंग कांम्प्रिहेंशन और जनरल अवेयरनेस संबंधित सवाल होंगे। वहीं पेपर-2 में 200 अंक के 100 प्रश्न पूछे जाएंगे। इस पेपर में अभ्यर्थी जिस विषय में परीक्षा में शामिल हो रहा है, उसे संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे। परीक्षा की तिथि अभी घोषित नहीं की गई है। 2018 में जेपीएससी ने निकाली थी वैकेंसी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक राज्य के विश्वविद्यालयों में फिलहाल असिस्टेंट प्रोफेसर के लगभग 40 प्रतिशत पद खाली हैं। इसका सीधा असर एकेडमिक एक्टिवटी पर पड़ रहा है। माना जा रहा है कि इसी वजह से सरकार ने जेपीएससी से नई नियुक्तियों के लिए पहल करने को कहा है। इससे पहले राज्य में 2018 में असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए जेपीएससी ने वैकेंसी निकाला था। इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए… वह सब कुछ जो जानना जरूरी है कैटेगरी वाइज परीक्षा शुल्क कुल 43 विषयों के लिए आयोजित होगी परीक्षा शैक्षणिक योग्यता…सामान्य और ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के अभ्यर्थियों के लिए मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से पीजी की परीक्षा में न्यूनतम 55% अंक होना जरूरी है। वहीं बीसी-1, बीसी-2, एससी, एसटी और दिव्यांग के लिए पीजी में न्यूनतम 50% अंक अनिवार्य है। प्रश्न पत्र एमसीक्यू आधारित…जेट परीक्षा की अवधि 3 घंटे की होगी। सभी सवाल एमसीक्यू टाइप के होंगे। इस परीक्षा में शामिल होने के लिए कोई आयु सीमा नहीं है। किसी भी उम्र के अभ्यर्थी इसमें शामिल हो सकते हैं। कुल परीक्षार्थियों में से केवल 6% का ही चयन किया जाएगा। परीक्षा कुल 43 विषयों के लिए आयोजित होगी। पहली बार 2007 में आयोजित हुई थी परीक्षा…झारखंड पात्रता परीक्षा पहली बार 2007 में आयोजित हुई थी। लेकिन इसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायतें सामने आईं थी। इसके बाद निगरानी की जांच में खुलासा हुआ कि आयोग के कार्यालय से परीक्षा से संबंधित सारे रिकॉर्ड गायब हैं। इस मामले में लालपुर थाने में एफआईआर भी दर्ज हुई थी। फिलहाल इसकी जांच सीबीआई कर रही है।


