अटल बिहारी वाजपेयी…जैसा नाम, वैसी शख्सियत। 25 दिसंबर को उनकी जयंती पर लखनऊ-दिल्ली में कार्यक्रम हुए। उनकी सादगी भरी राजनीति को याद किया गया। उनके पैतृक गांव बटेश्वर में भी कार्यक्रम हुए। पिछले साल अटल जयंती पर उनके पैतृक गांव बटेश्वर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहुंचे थे। उन्होंने 4 बड़ी घोषणाएं कीं। इसमें बटेश्वर के पास आगरा से वृंदावन तक हवाई दर्शन, यमुना किनारे घाट-मंदिर का जीर्णोद्धार, सांस्कृतिक संकुल केंद्र और अटल के पैतृक आवास की जगह स्मारक बनाया जाना था। ठीक एक साल बाद, दैनिक भास्कर टीम बटेश्वर पहुंची। आगरा शहर से करीब 80 किलोमीटर दूर बटेश्वर गांव में जाने के लिए बीहड़ के बीच से गुजरना होता है। सड़क से 300 मीटर दूर वाजपेयी मोहल्ला है, जहां का रास्ता जर्जर होता जा रहा है। मुख्य मार्ग से उतरकर वाजपेयी मोहल्ला जाने के रास्ते पर दोनों तरफ खंडहर हो चुके एक दर्जन घर हैं। आगे बढ़ने पर अटलजी के भतीजे रमेश चंद्र वाजपेयी का घर दिखता है। उनके घर से सटा हुआ बड़ा खंडहर है। यहां जो लोग दिखे, वह एक खंडहर की तरफ इशारा करते हुए बताते हैं- यही अटल बिहारी वाजपेयी का घर है। अगर यहां लोगों ने हमें न बताया होता, तो घर पहचानना मुश्किल हो जाता। क्योंकि यहां एक बोर्ड तक नहीं लगा था। दावा 1. पैतृक आवास…स्मारक नहीं बना
पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ। मगर, उनका बचपन बटेश्वर में स्थित उनके पैतृक घर में गुजरा। यहीं उनका पूरा परिवार रहता था। एक वक्त पर यही घर जनसंघ का बड़ा केंद्र हुआ करता था, मगर 1985 के बाद से यहां अटलजी ने आना कम कर दिया। घर खंडहर होता गया। इतने सालों में पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। अब बस घर की कुछ दीवारें बची हुई हैं, जो खुद ब खुद ढह रही हैं। अटलजी के घर की स्मृति बचाए रखने के लिए यहां पर 10 साल पहले एक चबूतरा बना दिया गया था। अब यह भी झाड़ियों में छिपा हुआ है। अब लोगों की बात पढ़िए… विकास यादव ने कहा- कागजों में काम बढ़िया हुआ, जमीन पर कुछ नहीं
बटेश्वर में अटल बिहारी वाजपेयी के पैतृक आवास पर स्मारक क्यों नहीं बना? इसको लेकर यहां रहने वाले लोगों से बात की गई। पहले हमारी मुलाकात विकास यादव से हुई। वह कहते हैं- एक साल पहले योगीजी आए थे। अटलजी के नाम पर कई काम करने के दावे हुए थे। मगर कागजों पर ही सब कुछ हो रहा है। घाट पर सही काम हो रहा, संकुल भी बना
यहीं से कुछ दूर आगे सड़क पर जाते हुए रामवीर मिले। वह कहते हैं- ये सही है कि अटलजी की यादों से जुड़ा कोई काम नहीं करवाया गया है। मगर, यमुना नदी के किनारे मंदिर और घाटों पर काम हो रहा है। वहां निर्माण चल रहे हैं। सांस्कृतिक संकुल केंद्र भी बना है। लोग बताते हैं कि वहां बिल्डिंग बन गई है, मगर सांस्कृतिक प्रोग्राम नहीं होते हैं। लाइब्रेरी भी नहीं खुल सकी है। दावा 2. संकुल केंद्र बना…मगर सांस्कृतिक गतिविधियां शुरू नहीं हुईं इसके बाद भास्कर टीम यमुना किनारे सांस्कृतिक संकुल केंद्र पहुंची। 25 दिसंबर, 2023 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसका लोकार्पण किया था। यहां मौजूद स्टाफ ने कैमरे पर बात करने से मना कर दिया। पता चला कि एक साल बाद भी यहां व्यवस्थाएं पूरी नहीं हो सकी हैं। लाइब्रेरी तो बना दी है, मगर इसमें किताबें नहीं आई हैं। इस संकुल का उद्देश्य सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है। अंदर जाने पर मल्टीपरपज हॉल में पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की कुछ तस्वीरें लगी दिखीं। मगर उनके जीवन से जुड़ा कोई साहित्य यहां नहीं दिखा। ऐसा महसूस हुआ कि ये संकुल सिर्फ बच्चों के खेलने का पार्क बना हुआ है। दावा 3. हवाई दर्शन, 1 साल में सिर्फ 1 उड़ान हुई
पिछली जयंती पर CM योगी ने बटेश्वर से हेलिकॉप्टर सेवा का शुभारंभ किया। उस दिन 1 हेलिकॉप्टर की पहली उड़ान भी हुई। मगर, यही आखिरी साबित हुई। बटेश्वर में जहां पर हेलीपोर्ट बनाया गया था। वहां अब बड़ी-बड़ी घास उग आई है। अब हेलीपैड नजर भी नहीं आता है। इस हेलीपैड को PWD ने बनाया था। इसका पूरा प्लान ऐसा था कि साल 2017–2018 में आगरा में हेलीपोर्ट प्रोजेक्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए। जिसके बाद आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे और इनर रिंग रोड (यमुना एक्सप्रेस-वे) के पास गांव मदरा में 5 एकड़ से ज्यादा जमीन पर 4.95 करोड़ रुपए में हेलीपैड बनाने का काम PWD विभाग ने शुरू किया था। वृंदावन में भी हेलीपोर्ट का निर्माण हुआ। दावा 4. यमुना के घाट और मंदिरों का जीर्णोद्धार
बटेश्वर में यमुना किनारे घाटों का जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। जो घाट खत्म हो चुके हैं, उन्हें नए सिरे से बनाया जा रहा है। नदी किनारे बने मंदिर का भी कायाकल्प किया जा रहा है। यहां पवित्र कॉरिडोर का जीर्णोद्धार हो चुका है। मंदिरों का संरक्षण किया जा रहा है। मंदिर के पीछे के 2 घाटों की मरम्मत चल रही है। सामने के 4 घाट को नए सिरे से बनाया रहा है। यहां अभी भी 55% काम बाकी है। टूरिज्म अधिकारी बोलीं- आने वाले टाइम में घाट आकर्षण का केंद्र होंगे
भास्कर ने उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की क्षेत्रीय अधिकारी दीप्ति वत्स से बात की। उन्होंने बताया कि बटेश्वर में पर्यटन विकास से जुड़ी 6 योजनाएं हैं। इन सभी पर कार्य चल रहा है। कुछ योजनाओं का बजट मार्च में ही स्वीकृत हुआ है। कुछ योजनाएं एक साल से चल रही हैं। कोशिश है कि सभी योजनाओं को समयावधि में पूरा कर लिया जाएगा। आने वाले टाइम में बटेश्वर के घाट आकर्षण का केंद्र होंगे। घाटों के आसपास के क्षेत्र को भी विकसित किया जा रहा है। जिससे कि लोग यहां आकर बैठ सकें। हवाई दर्शन को लेकर उन्होंने कहा कि यह लखनऊ से डील हो रहा है। इसलिए इसकी अपडेट देना मुश्किल होगी।
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