महात्मा व दुरात्मा की पहचान करना जरूरी

लुधियाना |श्री एसएस जैन सभा के तत्वावधान ने महासाध्वी सुशील कुमारी जी महाराज ने नूरवाला रोड जैन स्थानक में अपने प्रवचनों के माध्यम से श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि महात्मा तथा दुरात्मा की पहचान बाहय वेशभूषा, चेहरे या शरीर के आकार से नहीं होती। बल्कि उनकी पहचान उनके हृदय से, वाणी से और कार्य से होती है। दुरात्माओं के मन में कुछ, वचन में कुछ और कार्य में कुछ अलग तीसरी बात मिलेगी। वहीं, महात्मा लोगों के मन, वचन व काया में एकरूपता मिलेगी। वक्र स्वाभावी व्यक्ति अपने दोषों को छिपाने में अति कुशल होता है। ऐसा मानव अपने जीवन घोंट कर दुर्गति में जाता है। जिसकी बुद्धि, वाणी सरल है, उसकी आत्मा शुद्ध तथा महान होती है। उसके हृदय में परमात्मा का निवास होता है और उसके मुख से निकले शब्द प्रामाणिक होते है। इस अवसर पर जैन सभा प्रधान अवनीश जैन, महामंत्री अशोक जैन, उपप्रधान अरुण जैन, अमित जैन, तरुण जैन, अभिनंदन जैन, रुपाली जैन, वंदना जैन आदि मौजूद रहे।

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