प्रदेश में शासकीय कॉलेजों से डॉक्टरी पढ़ने के बाद पीजी करने के बाद 2 साल की शासकीय संविदा सेवा करने की अनिवार्यता है। डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री से मांग है की कि इस अनिवार्यता को समाप्त किया जाए। प्रदेश में चिकित्सा सेवा देने के इच्छुकों को मजबूरी में पलायन ना करना पड़े। 1997 का नियम अब प्रासंगिक नहीं है। संविदा सेवा करने की अनिवार्यता का आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, गुजरात आदि प्रदेशों में बंधन नहीं है। छत्तीसगढ में भी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से इसे खत्म करने का आग्रह डाक्टरों ने किया है। वे इसे अप्रासंगिक बताते हुए कहते हैं कि सन 1997 में कि जब नियम बना था, तब देश में और प्रदेश में डॉक्टरों की कमी थी। अब सरकार हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज खोलने जा रही है। आयुष्मान भारत हेल्थ कार्ड से बड़े अस्पतालों में इलाज की सुविधा गरीब नागरिकों को भी प्राप्त है। ऐसे में छत्तीसगढ़ को इस बंधन से मुक्त करना चाहिए। शासकीय संविदा सेवा की अनिवार्यता खत्म होने से डॉक्टरों का पलायन रुकेगा। एमबीबीएस कर चुके डॉक्टरों को उच्च शिक्षा अर्थात पीजी सीटों (स्पेशलिस्ट डॉक्टर) के लिए देश की सबसे कठिन प्रवेश परीक्षा नीट पीजी देनी होती है। ये परीक्षा नेशनल बोर्ड ऑफ़ एग्जामनेशंस द्वारा ली जाती है। वर्ष 2024 की नीट पीजी के चयन में 6 माह की देरी हुई है। चयनित स्टूडेंट की काउंसलिंग 20 नवम्बर से शुरू हो चुकी है। पीजी की सीटें कम होने के कारण मेरिट लिस्ट में रेडियोलॉजी, स्किन और मेडिसिन में मेरिट लिस्ट बहुत हाई जाती है। सेवा करना चाहते हैं, लेकिन मजबूर हैं: डॉ. विनय
सरायपाली के छोटे से गांव खमारपाली के विनय अग्रवाल ने नीट पीजी परीक्षा-2024 में प्रदेश की मेरिट लिस्ट में दूसरे स्थान पर हैं। अग्रवाल इंदौर की एमजेएम मेडिकल में “मेडिसिन” ब्रांच में आल इंडिया कोटे से एडमिशन ले रहे हैं। इसका कारण यह है कि संविदा की अनिवार्यता है। इसी वजह से उनकी बहन भी हैदराबाद में पढ़ रही है। खम्हारपाली के डॉ विनय ने मुश्किलों से स्कूली शिक्षा पूरी की। हाईस्कूल के लिए उसे 10 किलोमीटर दूर सरायपाली टैक्सी या अन्य व्हीकल से जाना पड़ता था। गांव में हमेशा बिजली कट के बीच, उसे लालटेन से पढाई करनी पड़ती थी। बाद में कोचिंग के लिए कोटा गए। वर्ष 2017 में पहले पहले एटीएम में 12वीं के बाद वह एमबीबीएस में सिलेक्ट हो गए। रायपुर मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कर अब इंदौर में मेडिसिन में विशेषज्ञ डॉक्टर बनेंगे।


