लोक अदालत में बिजली-बिल और लाइट कनेक्शन की समस्या को लेकर आए दिव्यांग को जज ने जमीन से उठाकर कुर्सी पर बैठाया। बुजुर्ग की समस्या सुनी और JVVNL के काउंटर पर पहुंच गए। अधिकारियों को बिल निकालने के लिए कहा। इस पर अधिकारी-कर्मचारी कंप्यूटर में झांकते रहे तो जज भड़क गए। उन्होंने अधिकारियों को फटकारते हुए कहा- इन अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ लेटर लिखो, ये लोग लोक अदालत में लोगों को परेशान करने आते हैं। इसके बाद JVVNL ने बुजुर्ग का बिल 55% माफ कर दिया। वहीं दूसरी ओर बाड़मेर में 2 बच्चों के माता-पिता 2 साल से अलग रह रहे थे। लोक अदालत में समझाइश कर दोनों को साथ रहने पर राजी किया गया। दोनों ने जज के सामने एक दूसरे को वरमाला पहनाई। बता दें कि राजस्थान में साल की तीसरी लोक अदालत का आयोजन हो रहा है। पहले देखिए भरतपुर की तस्वीरें… ज्यादा बिल आने पर पहुंचा था बुजुर्ग भरतपुर में करीब 10 हजार केस लोक अदालत में समाधान के लिए आए हैं। इसमें से 6 हजार 8 सौ 11 केस का निपटारा हो चुका है। इसी दौरान जिला जज केशव कौशिक निरीक्षण करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्हें एक दिव्यांग जमीन पर बैठा दिखाई दिया। उन्होंने तुरंत कुर्सी मंगवाई और दिव्यांग बुजुर्ग को कुर्सी पर बैठा कर उनकी समस्या सुनी। रामस्वरूप बंजारा ने बताया- वह पैरों से दिव्यांग हैं और एकता गांव के रहने वाले हैं। साल 2019 से बिजली का बिल जमा नहीं करवाया था। इसलिए बिजली विभाग ने 3 मार्च 2024 को कनेक्शन काट दिया। आज इस समस्या को लेकर लोक अदालत में आया था। बोले- लिखो ये लोगों को परेशान करने आते हैं बुजुर्ग की बात सुनकर जज कौशिक उठे और सीधा JVVNL के काउंटर पर पहुंचे। यहां उन्होंने बिल को लेकर जानकारी मांगी तो अधिकारी चौंक गए और बिल जनरेट करने लगे। इस दौरान जज कौशिक ने उनसे साफ कहा कि मुझे बिल अभी चाहिए। कितनी देर लगेगी, इस पर अधिकारी और ऑपरेटर कंप्यूटर में देखते रहे। मुझे स्टेटमेंट दिखाइए। इसके बाद उन्होंने कहा- इनका लेटर बनाओ और लिखो ये लोक अदालत में लोगों को परेशान करने के लिए आते हैं। जज की फटकार के बाद JVVNL ने उनका 55 प्रतिशत बिल माफ कर दिया। रामस्वरूप पर 40,631 रुपए बिल बकाया था। अब रामस्वरूप को 18,983 रुपए बिल जमा करवाना होगा। 2 साल बाद एक हुए पति-पत्नी इधर बाड़मेर में भी लोक अदालत का आयोजन हुआ। वकील गणेश कुमार मेघवाल ने बताया- बाड़मेर तिलक नगर निवासी धनवंती और चंपालाल की साल 2013 में शादी हुई थी। दोनों के 2 बच्चे हैं। दो साल पहले छोटी-मोटी बातों को लेकर दोनों में कहासुनी हुई। वरमाला पहनी आपस में विवाद इतना बढ़ा कि दोनों अलग हो गए। 2 साल पहले चंपालाल मेरे पास आए थे और कोर्ट में तलाक देने की अर्जी दाखिल करने को कहा था। 2024 में चंपालाल की तरफ से तलाकनामा पेश किया गया, जो विचाराधीन है। कुछ दिन पहले चंपालाल मेरे पास आए। तब मैंने उनकी पत्नी को भी बुलाया। दोनों को बुलाकर आपस में समझाइश की। समाज के मौजिज लोगों के समझाने पर दोनों मान गए। लोक अदालत में अध्यक्ष के रूप में एमएसीटी न्यायाधीश नरेंद्र सिंह मालावत और सदस्य जिला उपभोक्ता आयोग मेंबर सरिता पारीक ने मामलों का निपटारा करवाया।


