अपने जन्म दिन को खास बनाने के लिए लुधियाना के साउथ सिटी निवासी कारोबारी लव जिंदल अपनी पत्नी रिया जिंदल और पांच महीने की बेटी कायनाज के साथ नेपाल पहुंचे। नेपाल की वादियों में सुकून की तलाश में 7 सितंबर को पहुंचे कारोबारी परिवार ने पहले दिन काठमांडू में पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन किए। इसके बाद पति-पत्नी अपनी बेटी के साथ बाजार घूमने चले गए। लेकिन, ये ट्रिप एक खुशनुमा याद नहीं, बल्कि डरावनी हकीकत बन गई। 9 सिंतबर की सुबह तक सब ठीक था। दोपहर करीब 3 बजे अचानक होटल के बाहर शोर सुनाई दिया। खिड़की से देखा तो 200 से ज्यादा युवक-युवतियां बाइक पर हाथों में पोस्टर और हथियार लिए होटल की ओर बढ़ रहे थे। देखते ही देखते उन्होंने होटल में तोड़फोड़ शुरू कर दी। लव जिंदल ने बताया कि ये सब देखकर रोंगटे खड़े हो गए। होटल के कमरे में बर्थडे का केक, कपड़े, गिफ्ट्स…सब वहीं छोड़कर भागे और अपनी जान बताई। जान बची तो जान में जान आई। बैग, पैसे, मोबाइल, गहने सब लूटा जा रहा था, होटल में रुकना मतलब मौत को न्योता देने जैसा था होटल में हथियार लेकर घुसे युवक युवतियों को देखकर मैं घबरा गया। अचानक से ऐसा देखकर कुछ भी समझ में नहीं आया। मैंने बेटी को गोद में उठाया और प|ी का हाथ पकड़कर होटल के पिछले हिस्से की ओर भागा। होटल का स्टाफ और दूसरे पर्यटक भी हमारे साथ भाग रहे थे। हमारी बेटी लगातार रो रही थी। भूख से बिलख रही थी, लेकिन होटल में रहना मतलब मौत को न्योता देना था। हमारे साथ के एक और सैलानी के पास करीब पांच लाख रुपये थे, वो सब लूट लिए गए। होटल के कमरों में घुसकर बैग, पैसे, मोबाइल, गहने सब कुछ लूटा जा रहा था। हमें देखकर लगा जैसे हम किसी युद्धभूमि में हैं, जहां कोई कानून नहीं है। वो सब बच्चे थे, लेकिन उनके चेहरे पर अजीब-सी खुशी थी जैसे लूट का जश्न मना रहे हों। हालात से उबरने के बाद मैंने 10 सितंबर को भारत में अपने परिचितों को फोन कर मदद मांगी। 11 सितंबर को फ्लाइट की जानकारी मिली और हम तुरंत एयरपोर्ट पहुंचे, जहां से 12 सितंबर को भारत वापसी हुई। जब फ्लाइट में बैठे, तब लगा कि अब जिंदा बच पाएंगे। उससे पहले तक हर पल मौत का डर था। भारत सरकार और दूतावास का शुक्रगुजार हूं, जिन्होंने सही वक्त पर मदद की। ये पहला अनुभव था विदेश का और ऐसा अनुभव शायद दुश्मन को भी न हो। मैंने 9 सितंबर के लिए बर्थडे केक भी ऑर्डर किया था, लेकिन किस्मत में कुछ और ही लिखा था। वो दिन अब जन्मदिन नहीं, बल्कि जीवनदान का दिन बन गया है। जैसे ही घर पहुंचा पूरे परिवार की खुशी से आंखें नम हो गईं और सभी ने भगवान का शुक्राना किया। अब सिर्फ एक ही दुआ है बेटी और प|ी के साथ हमेशा महफूज रहूं। -जैसा कारोबारी लव जिंदल ने भास्कर को बताया।


