मेडिकल दस्तावेजों पर डॉक्टर की स्टैंप अनिवार्य

राजन गोसाईं | अमृतसर पंजाब सरकार ने सेहत विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य के सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों के डॉक्टरों निर्देश दिए गए हैं कि अब किसी भी तरह के मेडिकल दस्तावेज चाहे वह ओपीडी स्लिप हो, मेडिकल सर्टिफिकेट हो, मेडिको लीगल रिपोर्ट (एमएलआर) हो या पोस्टमार्टम रिपोर्ट (पीएमआर) के लिए केवल हस्ताक्षर करना पर्याप्त नहीं होगा। हरेक दस्तावेज पर डॉक्टर का नाम, पद और रजिस्ट्रेशन नंबर अंकित स्टैम्प लगाना जरूरी होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि 15 सितंबर से बिना नाम और रजिस्ट्रेशन नंबर वाली स्टैंप के हस्ताक्षर को मान्यता नहीं दी जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने पहले भी इस संबंध में डॉक्टरों को सूचित किया था, लेकिन अब इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक पिछले लंबे समय से सिविल अस्पतालों और अन्य सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों से मेडिकल दस्तावेजों में गड़बड़ियों और फर्जीवाड़े की शिकायतें मिल रही थीं। नए आदेश के लागू होने के बाद इस तरह की गड़बड़ियों पर रोक लगेगी । उधर, सेहत विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस आदेश से पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। जब हर दस्तावेज पर चिकित्सक का नाम, पद और रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज होगा, तो उसकी जांच और सत्यापन करना आसान हो जाएगा। विभाग का तर्क है कि इससे मरीजों को भी राहत मिलेगी, क्योंकि उन्हें सटीक और प्रमाणिक दस्तावेज उपलब्ध होंगे। सिविल अस्पताल, अमृतसर के सुपरिंटेंडेंट आचार्य गुरमीत सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान और सेहत मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने अहम फैसला लिया है। इस आदेश से अस्पतालों में लंबे समय से चल रहे फर्जीवाड़े का पूरी तरह से अंत हो जाएगा। मरीजों को सही दस्तावेज उपलब्ध होंगे। उन्होंने कहा कि कई बार डॉक्टर खुद अनजाने में गलतियों में फंस जाते थे, लेकिन अब चूंकि हर दस्तावेज पर पहचान की मुहर होगी, तो किसी भी विवाद में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। इस संबंध में सिविल अस्पताल की एसएमओ डॉ. रश्मि विज ने अस्पताल में तैनात सभी डॉक्टरों को निर्देश दिया है कि वे तुरंत अपनी स्टैंप तैयार कर लें। जिसमें उनका नाम, पद और रजिस्ट्रेशन नंबर साफ-साफ दर्ज हो। 15 सितंबर इसे इस्तेमाल करना होगा। लंबे समय से जारी फर्जीवाड़े और गड़बड़ियों को खत्म करने के लिए यह सख्ती जरूरी थी। अब देखना यह होगा कि 15 सितंबर से यह आदेश जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी साबित होता है।

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