व्यवस्था:महाकाल में नंदी द्वार, चिंतामण में जिगजैग से प्रवेश, कालभैरव में बंद रहेगा गर्भगृह

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के साथ चिंतामण गणेश, कालभैरव के दर्शन के साथ वर्ष की समाप्ति करने या नव वर्ष की शुरुआत करने जा रहे हैं तो यह खबर आपके काम की है। 12 ज्योतिर्लिंग में से तीसरे क्रम के श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में सबसे ज्यादा श्रद्धालु आने का अनुमान प्रशासन ने लगाया है। उसके बाद चिंतामण गणेश और कालभैरव मंदिर के दर्शन के लिए भक्त आएंगे। ऐसे में प्रशासन ने यहां आने वाले दर्शनार्थियों के दर्शन के लिए अलग-अलग प्रबंध किए हैं। जानिए… किस मंदिर में क्या रहेगी व्यवस्था, कैसे होंगे सुलभ दर्शन महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग
सामान्य दर्शनार्थी प्रवेश : चारधाम मंदिर पार्किंग स्थल से प्रवेश द्वार संग्रहालय के समीप से नंदी द्वार भवन, फेसेलिटी सेंटर 1 टनल, शक्ति पथ, त्रिवेणी, श्री महाकाल, मानसरोवर, नवीन टनल 1, गणेश मंडपम् से भगवान के दर्शन करेंगे।
निर्गम : दर्शन के बाद आपातकालीन निर्गम द्वार से दर्शनार्थी बाहर जाने के लिए बड़ा गणेश के समीप हरसिद्धि तिराहा पुनः चारधाम मंदिर पर पहुंचकर गंतव्य की ओर प्रस्थान करेंगे।
सामान्य दर्शनार्थियों की संख्या बढ़ी तो प्रवेश : फेसेलिटी सेंटर 1 से मंदिर परिसर निर्गम रैंप, गणेश मंडपम् और नवीन टनल दोनों ओर से श्रद्धालुओं की दर्शन व्यवस्था की जाएगी। श्रद्धालुओं की संख्या ओर अधिक होने पर फेसेलिटी सेंटर 1 से सीधे कार्तिकेय मंडपम् में प्रवेश करवाया जाएगा। निर्गम : दर्शन के बाद द्वार नंबर 10 अथवा निर्माल्य द्वार के रास्ते बाहर प्रस्थान कराए जाने की व्यवस्था की जाएगी।
वीआईपी प्रवेश : नीलकंठ द्वार से त्रिनेत्र यानी महाकाल लोक कंट्रोल रूम के सामने से होकर शंख द्वार, कोटितीर्थ कुंड के सामने से सभामंडपम् से मंदिर में प्रवेश करेंगे। निर्गम : दर्शन के बाद सभामंडपम् से कोटितीर्थ कुंड, शंख द्वार से त्रिनेत्र होकर नीलकंठ द्वार से मंदिर के बाहर जाएंगे। चिंतामण गणेश मंदिर
प्रवेश : सभी श्रद्धालु मंदिर के सामने डोम से प्रवेश कर जिगजैग से मंदिर के सामने परिक्रमा मार्ग पर पहुंचेंगे। प्रशासक अभिषेक शर्मा के अनुसार वर्ष की शुरुआत बुधवार से हो रही है। ऐसे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के मंदिर पहुंचने और दर्शन, पूजन का अनुमान लगाया जा रहा है। 1100 श्रीगणेश अथर्वशीर्ष पाठ : नव वर्ष के पहले दिन मंदिर के निकट स्थित 8 आश्रमों से बटुक और आचार्य मंदिर पहुंचेंगे। वे श्री गणेश अथर्वशीर्ष के 1100 पाठ करेंगे। पुजारियों के अनुसार सुबह विशेष पूजन, शृंगार किया जाएगा। उसके बाद मंदरि में दर्शन की शुरुआत होगी। मंदिर में दर्शन का क्रम अलसुबह से रात तक जारी रहेगा। गर्भगृह में प्रवेश बंद रहेगा। कालभैरव मंदिर
प्रवेश : श्रद्धालुओं को मंदिर के सामने बनाए बैरिकेडिंग से होकर मंदिर में मुख्य द्वार पर पहुंचना होगा। यहां से वे दीपमालिकाओं के पास से होकर सीधे मंदिर के सामने पहुंचेंगे। यहां से कतार में चलित दर्शन के बाद के बाद वे मंदिर के पीछे से होकर निर्गम द्वार से बाहर निकल सकेंगे।
गर्भगृह में नहीं जा सकेंगे : बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को देखते हुए मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश बंद रखा जाएगा। बुजुर्ग, दिव्यांगों को मंदिर के निर्गम द्वार से प्रवेश करवाया जा सकेगा।

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