नमस्कार लड़के-लड़कियों का घर से भागना समझ में आता है। नेताजी की चिंता है घर से भागने वाली 4-4 बच्चों की मां। चिंता पुलिस की भी कम नहीं है। पुलिस भर्ती में नकल रोकने के लिए प्राइवेट बाउंसर बिठाने पड़े। अजमेर के 7 वंडर्स के बनने-बिगड़ने के पीछे भी प्रेम कहानी है। चूंकि मामला पेचीदा है, इसलिए ज्यादा कुछ कह भी नहीं सकते। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की खरी-खरी सुनिए… 1. MLA बोले- 3-3 बच्चों की मां भाग रहीं, SHO ने कहा- बताकर जाना चाहिए अपराध और राजनीति के अलावा एक तीसरी चिड़िया है, जिसका नाम है-नैतिकता। आजकल इस चिड़िया का भी भरोसा नहीं। कभी भी, कहीं भी फुर्र हो जाए। बालिग होते ही ये चिड़िया कानून के जाल से मुक्त हो जाती है। यही वजह है कि 18 की उम्र पार करने के बाद प्रेम-प्रसंग में भागने वालों के सामने पुलिस-प्रशासन सब नतमस्तक। ओसियां विधायक भैराराम सियोल कभी सभा में तो कभी विधानसभा में नैतिकता वाले दर्द का बखान करते रहते हैं। कह चुके हैं- जीतने के बाद भी दुखी हूं। महीने में 15 फोन ऐसे आते हैं कि मेरी पत्नी भाग गई, मेरी बेटी भाग गई। 20-22 की उम्र के बच्चे-बच्चियों का भागना समझ आता है। लेकिन 3-3, 4-4 बच्चों की माएं भाग रही हैं। बताओ मैं क्या करूं? नेताजी ने फोन को इस रोग की जड़ बताया। वे बेबस हैं। यही हाल पुलिस का है। चौमूं थाने के SHO प्रदीप कुमार ने तो वीडियो बनाकर मनुहार सी कर दी-जा सिमरन जा, लेकिन जाने से पहले पुलिस को तो बता जा कि कहां जा रही है? हम अपराधियों को पकड़ें या तुमको ढूंढें। 2. अजमेर में प्रेम की निशानी के पीछे ‘प्रेम की कहानी’ अजमेर में आनासागर के किनारे पाटकर 7 अजूबे बना दिए। आजकल यहां क्रेन, डंपर और बुलडोजर धड़धड़ा रहे हैं। मिस्र का पिरामिड ध्वस्त हो गया। एफिल टावर का लौह-जाल उतार लिया गया। रोम का कोलेसियम और पीसा की झुकी मीनार सब मटियामेट हो गए। अफसर लोग प्रेम की निशानी ताजमहल की ओर देख मन ही मन मुस्काते हैं। इस पर हथौड़ा चलाने वाला कोई पत्थर दिल ही होगा। चर्चा है कि सेवन वंडर्स आबाद होने और बर्बाद होने के बीच भी शाहजहां और मुमताज वाली कहानी है। लेकिन इस प्रोजेक्ट की तरह प्रेम-कहानी भी इल-लीगल। अब हमें तो ज्यादा गहराई का पता नहीं। लेकिन इस मामले को जितना ज्यादा खोदेंगे, उतनी ही उलझी हुई कहानियां निकलेंगी। रहने देते हैं। 3. पुलिस की भर्ती में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए ‘प्राइवेट बाउंसर्स’ पुलिस को पुलिस भर्ती का इम्तिहान देने आने वालों पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं है। ये भर्ती सबसे बड़ी सिरदर्दी है। ऐसे में जयपुर में कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा के लिए फुल टाइट सिक्योरिटी की गई। शेरा जैसे दिखने वाले प्राइवेट बाउंसर तक बैठा दिए। एक बाउंसर ने तो डोले-शोले दिखाकर कहा-अच्छी तरह चेक कर रहा हूं। कमांड कंट्रोल रूम भी बनाया गया। इसमें दर्जनों स्क्रीन पर पलक झपकाए बिना एक्सपर्ट दम साधे दिखे। लैपटॉप खुले हुए। एक-एक कैंडिडेट पर पारखी नजर। क्या करें। करना ही पड़ेगा। भर्ती का दर्द तो सालों-साल से परेशान कर रहा है। लोगों का जीवन खराब हो जाता है। कोई करता है। कोई भरता है। कोर्ट कचहरी में उलझने से अच्छा है कि सिक्योरिटी ही टाइट रहे। 4. चलते-चलते… भीलवाड़ा में बनास में पानी आया। कई जगह रपट के लेवल पर धार आ गई। अब मछलियां पानी से फुदक कर सड़क पर आ रही हैं। रपटों पर मछली के लिए अजब खेल शुरू हो गया है। जैसे ही मछली पानी से बाहर रपट पर जंप मारती है और मच्छी-लूट मच जाती है। लड़कों का झुंड टूट पड़ता है। हर कोई अपनी तरकीब लगाता है। कोई हाथों से लपकता है। कोई शर्ट में फांसने की कोशिश करता है। कोई सड़क पर लाठी बजाने लगता है। कोई पैर से ठेलकर दूर ले जाता है। कोई औंधा ही गिरकर टूट पड़ता है। मशक्कत के बाद मछली हाथ आ ही जाती है। फ्री-फोकट घर में फिश करी तैयार हो जाती है या फिर बेच दी जाती है। हालांकि रपट पर दौड़-दौड़कर मछली पकड़ने की ये होड़ खतरे से खाली नहीं। लेकिन पेपरलीक की बड़ी मछलियों को पकड़ना SOG इन्हीं से सीखे तो बेहतर। जय-जय राजस्थान। वीडियो देखने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब मंगलवार को मुलाकात होगी…


