यूनियन कार्बाइड के 337 टन जहरीले कचरे को पीथमपुर भेजने की तैयारी शुरू 1. विशेषज्ञों की निगरानी में जहरीले कचरे की पैकिंग शुरू, स्पेशल किट, बैग, कंटेनर तैनात 2. पैकिंग में 24 से 48 घंटे लगेंगे, 12 कंटेनर ग्रीन कॉरिडोर बनाकर पीथमपुर भेजे जाएंगे भोपाल गैस त्रासदी के 40 साल बाद यह पहला मौका है, जब यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर में इतनी हलचल है। वजह- भोपाल के सीने पर बोझ की तरह जमा 337 मीट्रिक टन जहरीला कचरा आखिरकार हट रहा है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद इसे निस्तारण के लिए पीथमपुर ले जाया जाएगा। शनिवार से तैयारियां शुरू हो गई थीं। रविवार तड़के 12 कंटेनर यहां पहुंचे। रामकी कंपनी के एक्सपर्ट्स ने इनकी जांच की। दोपहर 3:30 बजे विशेष जंबू बैग में कचरा भरना शुरू हुआ। जहरीला कचरा भरते हुए विशेष सावधानी बरती जा रही है। हवा में यूनियन कार्बाइड गैस फैलने के कारण 1984 में 5 हजार से अधिक मौतें हुईं थी। इसीलिए यूका परिसर में 3 जगहों पर एयर क्वालिटी की मॉनिटरिंग के लिए उपकरण लगाए हैं। इनसे पीएम 10 व पीएम 2.5 के साथ नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड आदि की जांच की जा रही है। कचरा जिस स्थान पर रखा है, उस इलाके की धूल भी कचरे के साथ जाएगी। यदि कहीं कचरा गिरा है तो उस जगह की मिट्टी को भी पीथमपुर ले जाया जाएगा। इस मिट्टी और धूल की भी टेस्टिंग होगी। जांचा जाएगा कि कहीं मिट्टी भी तो जहरीली नहीं हुई? 40 साल बाद यह पहला मौका, जब फैक्ट्री परिसर में इतनी हलचल वह सबकुछ जो आपको जानना जरूरी ऐसे कंटेनर और बैग जो आग में भी नहीं जलेंगे, रिसाव नहीं होगा कैसे पैक किया जा रहा है?
अभी 337 टन जहरीला कचरा थैलियों में फैक्ट्री के अंदर रखा है। इसे खास जंबू बैग में पैक किया जा रहा है। ये एचडीपीई नॉन रिएक्टिव लाइनर के बने हैं। इनमें मटैरियल में कई रिएक्शन नहीं हो सकता।
पैकिंग : बैग में कचरा भरने के लिए 50 से अधिक लेबर लगे हैं। ये सभी पीपीई किट पहने हैं। ताकि कैमिकल के संपर्क में आने पर शरीर को नुकसान न हो। सुरक्षा के इंतजाम क्या?
100 से ज्यादा पुलिस जवान सुरक्षा में हैं। 3 थाने छोला, गौतम नगर व निशातपुरा अलर्ट पर हैं। ड्यूटी पर लगे सरकारी कर्मचारियों के लिए आईडी जरूरी है। 250 अफसर-कर्मचारी व डॉक्टरों की टीम जुटी। कचरा पीथमपुर कब जाएगा?
पैकिंग में 24 से 48 घंटे लगेंगे। 3 जनवरी से पहले कंटेनर पीथमपुर पहुंचाएंगे। पीथमपुर कैसे ले जाएंगे?
जंबू बैग को 12 हैडार्डस वेस्ट कंटेनर में रखा जाएगा। इनमें लीकेज नहीं हो सकता। आग भी लगे तो कंटेनर व मटेरियल को नुकसान नहीं होगा। सभी 12 कंटेनर साथ ग्रीन कॉरिडोर बनाकर रवाना होंगे। कचरे का निष्पादन कैसे होगा?
कंटेनर को भेजने से पहले यहां वजन होगा और पीथमपुर में पहुंचने पर वहां भी वजन किया जाएगा। पीथमपुर में कचरे को रखने के लिए लकड़ी का प्लेटफॉर्म बनाया गया है। यह प्लेटफार्म जमीन से करीब 25 फीट ऊपर बना है। इस कचरे को कब जलाना है, यह फैसला सीपीसीबी के वैज्ञानिकों की टीम करेगी। वही उसे जलाने की पूरी प्रक्रिया तय करेगी। किस मौसम में, कितने तापमान पर और कितनी मात्रा में जलाया जाए, यह फैसला लेने से पहले सैंपल टेस्टिंग भी होगी।


