परिवहन विभाग की काली कमाई से धनकुबेर बने पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा और उसके सहयोगी चेतन सिंह के अब भी कई राज हैं। अब तक की जांच में सामने आया है कि लोकायुक्त पुलिस, सीबीआई और दूसरी जांच एजेंसियों के पास महीनों से सौरभ शर्मा की लिखित शिकायत पहुंच रही थी। यह 500 करोड़ से अधिक बेनामी संपत्ति से जुड़ी है। दो शिकायतकर्ताओं राजाराम खंडेलवाल और इंद्रजीत सिंह गौर के द्वारा दिया गया लिखित पत्र ‘भास्कर’ के पास मौजूद है।
लोकायुक्त संगठन के सूत्र बता रहे हैं कि सौरभ के खिलाफ पिछले सालभर में ही 50 से अधिक शिकायतें जांच एजेंसियों के पास पहुंचीं। इन सभी में बैरियर के कलेक्शन, देसी हवाला, अफसरों को घूंस के साथ कई चौंकाने वाले तथ्य हैं।
सूत्रों का कहना है कि ये शिकायतें आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) के पास भी पहुंची थी। एक साल पहले जांच के बद उसे क्लीनचिट दे दी गई। समिति के बारे में जानकारी जुटाने के लिए लिखा गया कि रजिस्ट्रार फर्म्स एंड सोयासटी को पत्र भेजकर जांच कराई जा सकती है। जिस केके गोगिया के नाम पर सौरभ ने अरेरा कॉलोनी में मकान खरीदा, एजेंसी को उससे भी संबंध नहीं मिले। परिवहन विभाग ने बैरियर से वसूली की कोई जानकारी नहीं दी। सौरभ के सहयोगी के रूप में शरद जायसवाल की जगह आकाश कुमार पटेल का नाम मिला। शिकायकर्ता राजाराम का पता भी जांच एजेंसी को सही मिला। ऐसे में अब छापे के बाद इस क्लीनचिट पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आधा एकड़ जमीन के लिए बीडीए में 19 लाख कैश जमा किया 500 करोड़ के भ्रष्टाचार का फैमिली कारोबार, सौरभ की पत्नी, ससुर, मां और बेटे सबके नाम इन संपत्तियों को भी सौरभ से जोड़ा गया बता दें कि लोकायुक्त पुलिस ने सौरभ शर्मा के ठिकानों पर छापेमारी की थी। उसके ठिकानों से 234 किलो चांदी और करोड़ों नकदी मिली। इसके बाद उसके सहयोगी लावारिस कार से आयकर को 54 किलो सोना और 10 करोड़ नकदी मिली थी। सौरभ दुबई भाग गया है।


