‘हर म्यूजिकल फिल्म सैयारा नहीं हो सकती’:मन्नू क्या करेगा की टीम बोली- हर फिल्म की अपनी राह, मकसद और आत्मा होती है, तुलना ना करें

आपके जीवन का पर्पस क्या है? कभी-कभी ये सवाल कोई और नहीं, खुद हम भी अपने आप से पूछते हैं। इसी सवाल को समझने और आसान बनाने के लिए 12 सितंबर को आ रही है फिल्म मन्नू क्या करेगा।फिल्म की स्टारकास्ट, राजेश कुमार, व्योम ,साची बिंद्रा और फिल्म के डायरेक्टर संजय त्रिपाठी ने हमसे खुलकर बात की। बातचीत में उन्होंने बताया कि कैसे आप अपनी जिंदगी का पर्पस ढूंढ सकते हैं। साथ ही सोशल मीडिया पर “सैयारा कैंप” से हो रही तुलना पर उन्होंने इंडस्ट्री को करारा जवाब भी दिया। सवाल- आज जब हर किसी के पास हर सवाल का जवाब है, आप अपनी फिल्म की कहानी एक सवाल से शुरू कर रहे हैं – ‘मन्नू क्या करेगा’? ऐसा क्यों? जवाब/ संजय त्रिपाठी- देखिए, ये सवाल हर घर में पूछा जाता है कि “बेटा, आगे क्या सोचा है?” मन्नू भी वैसा ही लड़का है टैलेंटेड है, पोटेंशियल है, लेकिन उसे नहीं पता कि वो करना क्या चाहता है। और फिर उसकी लाइफ में एक गर्लफ्रेंड भी आती है, जिससे वो और भटक जाता है।फिल्म में एक डायलॉग है – “ढूंढने से नौकरी मिलती है, पर्पस नहीं।”यही इसकी इस फिल्म की कहानी है कि मन्नू कैसे खुद को खोजता है। सवाल- फिल्म में एजुकेशन सिस्टम पर कटाक्ष है कि हम बच्चों को दुनियादारी सिखाते हैं लेकिन पर्पस बताने में फेल हो जाते हैं? जवाब/ राजेश कुमार- बिल्कुल।आज के एजुकेशन सिस्टम ने बच्चों को एक बॉक्स में डाल दिया है। हम इस फिल्म के जरिए खासकर इस जनरेशन को यही कहना चाहते हैं – “यूनिवर्सिटी के लिए नहीं, यूनिवर्स के लिए तैयारी करो।” पेरेंट्स और टीचर्स को ये समझने की जरूरत है कि बच्चों पर कंपटीशन और तुलना का दबाव डालना बंद करें। उन्हें खुद उड़ने दीजिए वो खुद अपना घोंसला बना ही लेंगे। सवाल- व्योम, फिल्म में लीड रोल निभा रहे हैं। क्या आप भी अपनी पर्सनल लाइफ में ये सवाल पूछते हैं – ‘व्योम क्या करेगा?’ साथ ही अपने किरदार के बारे में बताएं। जवाब/ व्योम- सवाल तो रोज सुबह उठते ही पूछता हूं खुद से कि“अपने सपनों को पूरा करने के लिए आज क्या करना है?”। अगर कोई ये सवाल खुद से नहीं पूछ रहा, तो वो खो गया है। फिल्म में मैंने देव का किरदार निभाया है। मुझे इसमें ज्यादा दिक्कत नहीं हुई क्योंकि मैं रियल लाइफ में भी वैसा ही हूं। मैं शूट के दौरान किसी होटल में नहीं रुका, जहां शूट हो रहा था – उसी कॉलेज कैंपस में रहता था। पैकअप के बाद भी स्टूडेंट्स से मिलता, बातें करता, ताकि मैं अपने किरदार में ढल सकूं।इसी तरह से मैंने अपने रोल पर वर्क किया। सवाल- साची, फिल्म के पोस्टर में आपके हाथ में एक किताब है।जिस पर लिखा है आपका इकीगाई क्या है? इसका मतलब क्या है और फिल्म से इसका क्या कनेक्शन है? जवाब/ साची-फिल्म में मैं जिया का रोल निभा रही हूं।जो बहुत फोकस्ड लड़की है। उसे पता है कि उसे जिंदगी में क्या करना है।और जो किताब मेरे हाथ में है उसमें IKIGAI लिखा है, जिसका मतलब है “जीवन का उद्देश्य”। फिल्म भी इसी बात पर है कि मन्नू अपने पर्पस को ढूंढ रहा है। मैं अपनी बात करू तो मैंने रियल लाइफ में अपना पर्पस ढूंढ लिया है। मैं हमेशा से फिल्म इंडस्ट्री में आना चाहती थी। अगर एक्टर नहीं बनती, तो डायरेक्शन या राइटिंग में जाती। सवाल- आपने इस फिल्म में न्यूकमर्स को मौका दिया।ये फिल्म इंडस्ट्री में कम होता है। ऐसा क्यों और कास्टिंग कैसे की? जवाब/ संजय त्रिपाठी- मैं खुद को खुशनसीब मानता हूं कि मुझे नए टैलेंट के साथ काम करने का मौका मिला। नए लोग सीखने को तैयार रहते हैं, इसलिए काम आसान हो जाता है। साची ने पहले AD का काम किया है। तो उसे सेट की हर चीज़ का अंदाज़ा था। शूट के दौरान एक सीन था रात का, जो टेबल पर बैठकर रिहर्स नहीं हो सकता था। मैंने कहा एक्ट्रेस से “लोकेशन पर चलना पड़ेगा।”व्योम और सांची बोले “चलो सर अभी चलते हैं।” और हम रात में वहां रिहर्स करने गए। ऐसा डेडिकेशन आजकल सिर्फ नए कलाकारों में ही नजर आता है। सवाल- कुछ लोग आपकी फिल्म की तुलना सैयारा फिल्म से कर रहे हैं इसपर क्या कहेंगे? जवाब/ राजेश कुमार- देखिए, हर म्यूजिकल फिल्म सैयारा नहीं हो सकती।ऐसा हाल ही में किसी ने ट्वीट कर कहा भी जो गलत हैं।मैं उस बड़ी हस्ती से बस इतना कहूंगा कि इंडस्ट्री सिर्फ एक या दो लोगों की नहीं है लाखों लोग मेहनत करते हैं।किसी फिल्म को जल्दी जज करना बंद कीजिए। मन्नू क्या करेगा एक ऐसी फिल्म है, जो आपको जिंदगी के किसी भी मोड़ पर अपने पर्पस को ढूंढने में मदद करेगी।

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