झारखंड वित्त आयोग राज्य बजट से पहले फरवरी में राज्य सरकार को अपनी पहली रिपोर्ट सौंप सकता है। आयोग ने विभिन्न विभागों से जानकारी मांगी है। जनवरी के दूसरे सप्ताह में आयोग के अध्यक्ष एपी सिंह और सदस्य प्रो. हरिश्वर दयाल कर्नाटक जाएंगे और उसकी रिपोर्ट का अध्ययन कर विशेषज्ञों के साथ बैठक भी करेंगे। कर्नाटक वित्त आयोग ने इसी साल करीब छह माह पहले अपनी एक रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी है। उस आधार पर कर्नाटक सरकार ने भी अपने रोके गए पैसे की मांग केंद्र सरकार से की है। इधर, कर्नाटक को राशि मिलने की संभावना पर राज्य सरकार के कई अधिकारी अध्ययन करने में लगे हैं। झारखंड वित्त आयोग की पहली रिपोर्ट आने पर राज्य सरकार भी कर्नाटक पैटर्न पर कदम उठा सकती है। मालूम हो कि केंद्र सरकार से झारखंड को 15वें केंद्रीय वित्त आयोग की अनुशंसा पर मिलने वाला 1641 करोड़ रुपए का अनुदान रुका हुआ है। पहले क्यों नहीं तैयार हुई रिपोर्ट झारखंड सरकार ने 23 फरवरी 2024 को मुख्य सचिव रैंक से रिटायर अधिकारी एपी सिंह को राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष और अर्थशास्त्री प्रो. हरिश्वर दयाल को सदस्य बनाया। मार्च में राज्य सरकार ने आयोग गठन की जानकारी देते हुए राशि नहीं रोकने का आग्रह किया था, पर केंद्र से आश्वासन नहीं मिला। झारखंड में पांच साल से राज्य वित्त आयोग पूरी तरह निष्क्रिय था। झारखंड पंचायत राज अधिनियम के तहत 2004 में राज्य वित्त आयोग का गठन हुआ था। रिटायर मुख्य सचिव जी. कृष्णन इसके पहले अध्यक्ष थे। पहले वित्त आयोग ने अपनी रिपोर्ट दी थी। इसके बाद कोई रिपोर्ट तैयार नहीं हुई। आयोग में अध्यक्ष-सदस्य का पद लंबे समय तक खाली था। क्या-क्या करना है वित्त आयोग को राज्य वित्त आयोग का मुख्य काम पंचायतों और नगर पालिकाओं की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करना है। केंद्र सरकार और केंद्रीय वित्त आयोग की अनुशंसा पर राज्य को जो राशि मिलती है, उसके वितरण के लिए गाइडलाइन तैयार करना राज्य वित्त आयोग का काम है। राज्य सरकार भी अपने खजाने से जो राशि देती है, उसे भी वित्त आयोग पंचायती राज संस्थाओं और नगर पालिकाओं के बीच वितरित करता है। राज्य वित्त आयोग के गठन में देरी के कारण केंद्र ने पैसा रोकने का कदम उठाया था। केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय की संयुक्त सचिव ममता वर्मा ने 15वें वित्त आयोग की अनुशंसा के आलोक में अनुदान जारी रखने के लिए निर्धारित शर्तों को पूरा करने का निर्देश दिया था। वित्त मंत्रालय ने अनुदान के लिए 14 जुलाई 2021 और दो जून 2022 को ऑपरेशनल गाइडलाइन जारी की थी। इसमें सभी ग्रामीण निकायों के पास पिछले साल का अंतरिम लेखा (प्रोविजनल अकाउंट) और इससे पहले ऑडिट किए गए अकाउंट देने की अनिवार्यता थी। राज्य वित्त आयोग की अनुशंसाएं और उसके क्रियान्वयन की एटीआर को विधानसभा में पेश होना जरूरी था। केंद्र ने कहा था कि अगर किसी राज्य ने इन शर्तों को पूरा नहीं किया हो तो वह मार्च 2024 तक इसे पूरा करे और इसकी रिपोर्ट (एटीआर) विधानसभा में पेश कर ले। ऐसा नहीं होने की स्थिति में संबंधित राज्यों के ग्रामीण स्थानीय निकायों (आरएलबी) को 2024-25 में अनुदान नहीं मिलेगा। लेकिन उस समय राज्य में आयोग बना ही नहीं था। मालूम हो कि वर्ष 2024-25 के लिए 1641.60 करोड़ और 2025-26 के लिए 1094.40 करोड़ रुपए झारखंड की पंचायती राज संस्थाओं का अनुदान तय है। राज्य वित्त आयोग के गठन में देरी के कारण रुका है पैसा राज्य के नगर निकायों और पंचायती राज संस्थाओं को दो साल में मिलना था 2736 करोड़ रुपए अनुदान


