गोस्वामी तुलसीदास मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा रविवार को समाप्त हो गई। जिसमें व्यास गद्दी पर विराजमान पंडित भाई नरेश शर्मा ने कथा का बखान किया। उन्होंने कहा कि ठाकुर जी का नाम लेने में मुझे प्रसन्नता होती है। सभी के दाता प्रभु राम है हमें तो उनका ध्यान लेते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि समुंदर में जाने को जिस तरह नदियां अपना रास्ता बना लेती हैं। उसी तरह हमें भगवान से मिलने के लिए प्रभु सिमरन जरूरी है। महाराज ने चिंतन की शक्ति पर जोर देते हुए कहा कि यदि आपका चिंतन शुद्ध और श्रेष्ठ है तो आप कहीं भी बैठकर भगवान के दर्शन कर सकते हैं। इसके विपरीत, यदि चिंतन श्रेष्ठ नहीं है, तो आप बिहारी जी के मंदिर में जाकर भी उन्हें नहीं देख पाएंगे। कथा समाप्ति पर सभी को प्रसाद बांटा गया। कथा में कई भक्तजन और मंदिर कमेटी के सदस्य शामिल हुए।


