भास्कर: सेंगोल आपके पास भी है,कैसे मिला?:मोहनबाबू बोले- नेहरू-मोदी के बाद मैं तीसरा शख्स, जिसे अधीनम स्वामी ने सेंगोल दिया

सामान्य से दिखने वाले मोहनबाबू साउथ फिल्मों के सुपरस्टार हैं। 70 के दशक से फिल्मी करियर शुरू करने वाले मोहनबाबू के किरदार का हर पहलू दिलचस्प और अलग है। उन्हें डायलॉग और कलेक्शन किंग भी कहा जाता है। मोहनबाबू ने 500 से ज्यादा फिल्में की हैं। ये उनकी पेशेवर उपलब्धि है। फिल्मी पटकथा और एक्टिंग से अलग मोहनबाबू के पास एक दूसरी ताकत भी है। कम ही लोग जानते हैं कि नेहरू और प्रधानमंत्री मोदी के बाद वे तीसरे ऐसे शख्स हैं, जिन्हें अधीनम स्वामी ने सेंगोल सौंपा है। वैसा ही सेंगोल, जो नई संसद में स्थापित है। इन दिनों मोहनबाबू अपनी सबसे बड़े बजट वाली फिल्म कन्नपा के कारण भी चर्चा में हैं। सप्ताह की बातचीत में आज पढ़िए पद्मश्री मोहनबाबू की जिंदगी की पूरी स्क्रिप्ट…
आप तेलुगू सिनेमा के सुपरस्टार हैं। 50 साल के फिल्मी सफर में खलनायक से नायक बनने की कहानी क्या है? 8वीं-9वीं क्लास में था, जब पिताजी के कहने पर नाटकों में काम किया। पूरी तरह अभिनय से तभी जुड़ना चाहता था, जब हाथ में नौकरी हो। चेन्नई के स्कूल में पीटी टीचर नियुक्त हुआ, लेकिन मेरी जाति के कारण स्कूल के ट्रस्टी ने मुझे निकाल दिया। 1970-74 का दौर चुनौतियों भरा था। 1975 में फिल्म का ऑडिशन दिया। 6 एक्टरों में निर्देशक दासरी नारायण राव ने मुझे चुना। उन्होंने मेरा नाम भक्तवत्सल से मोहनबाबू रखा। बस तभी से मोहनबाबू नं. 1 विलेन, हीरो, कॉमेडियन और प्रोड्यूसर हो गया। रजनीकांत आपके बेहद करीबी हैं। प्रभास, जूनियर एनटीआर और मोहनलाल भी दोस्त हैं मगर चिरंजीवी से अदावत क्यों? रजनीकांत से मैं 1974 में मिला। रजनीकांत और मेरे संघर्ष की कहानी एक-सी है। हम एक ही कमरे में रहते थे और रोज भाग्य आजमाते थे। दोनों ने ही विलेन के किरदार से फिल्मों में कदम रखा। फिर कॉमेडियन और हीरो के किरदार तक पहुंचे। प्रभास परिवार जैसे हैं, जिन्हें मैं प्यार से बावा कहता हूं। मेरी कोई बहन होती तो मैं उसकी शादी प्रभास जैसे इंसान से कराता। रही बात चिरंजीवी की तो आर्टिस्ट एसोसिएशन चुनाव में चिंरजीवी ने मेरे बेटे विष्णु के खिलाफ कैंपेनिंग की थी। फिर भी विष्णु ही जीता। इससे से संदेश गया कि हम दोनों के बीच अदावत है। न मैंने उसकी कोई जायदाद ली और ना उन्होंने। आपके पास सेंगोल है, जैसा कि संसद में स्थापित है। आपको कैसे मिला? 1947 में तमिलनाडु के मठ अधीनम ने पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू को सेंगोल सौंपा था। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए संसद भवन में स्थापित किया। मेरा अधीनम से पुराना रिश्ता था। मैंने सेंगोल देखने और छूने की इच्छा रखी। वहां गया तो कन्नप्पा फिल्म से मेरे जुड़ाव को देखते हुए स्वामी ने मुझे सेंगोल को छूने की अनुमति दी। स्वामी ने मुझसे सेंगोल अपने पास मंगवाया और मुझे सौंपते हुए कहा कि तुम शिवभक्त कन्नप्पा पर फिल्म बना रहे हाे, इसे रखो। बस, इससे ज्यादा मैं सेंगोल पर बात नहीं करूंगा। टॉलीवुड के पास ऐसा क्या फॉर्मूला है, जो फिल्में सुपरहिट हो रही हैं? कुछ साल पहले दक्षिण भारतीय फिल्मों का ऐसा दबदबा नहीं था। दक्षिण में सुपरस्टार तो थे पर हिंदी फिल्में ही राज करती थीं। आज हिंदी भाषी क्षेत्रों में भी हमारी फिल्में चलती हैं। मैं मानता हूं कि हमारी फिल्मों की कहानियां हमारी मिट्‌टी, खासकर गांवों से जुड़ी होती हैं, जो दर्शकों के दिल को छूती हैं। पटकथा भी गांव की परंपराओं में गुंथी मूल कहानियों पर आधारित हैं। मुझे लगता है कि बॉलीवुड लेखकों को ऑरिजिनल स्क्रिप्ट पर फोकस करना चाहिए। क्योंकि कॉफी हाउस में बैठकर कहानियां नहीं लिखी जातीं। 90% अच्छी फिल्में अच्छी कहानियों से ही बनती हैं। बड़े बजट वाली आपकी फिल्म कन्नप्पा का सबको इंतजार है? यह साउथ की सुरपहिट फिल्मों से कितनी अलग है? आदिवासी नायक पर आधारित फिल्म कन्नप्पा पहले बनाई जा चुकी मूल कन्नप्पा फिल्मों से प्रेरित है, जो उस जमाने में भी सुपरहिट थीं। इसकी स्क्रिप्ट को परफेक्ट बनाने में 10 लेखकों को 6 साल लगे। कन्नप्पा में मेरा बेटा विष्णु मेन रोल में है। मोहनलाल, प्रभास, शरत कुमार और अक्षय कुमार भी हैं। प्रभास के पिता की फिल्म में मैंने विलेन का किरदार निभाया था। कन्नप्पा में मेरा किरदार महादेव शास्त्री का है, आपको महसूस होगा कि इसके डायलॉग्स मेरे लिए ही लिखे गए हैं। फिल्म सभी रिकॉर्ड तोड़ेगी। आप पीएम मोदी के करीब हैं। चंद्रबाबू नायडू, वाईएसआर रेड्‌डी आपके रिश्तेदार हैं। तीनों विचारधाराओं में संतुलन कैसे बैठाते हैं? राजनीति और निजी संबंध अलग होते हैं। संतुलन बैठाना वहां जरूरी होता है, जब आपका व्यक्तिगत स्वार्थ सिद्ध हो रहा हो। पीएम नरेंद्र मोदीजी का नेतृत्व और हिंदुत्व के प्रति सोच मुझे पसंद है। उनका नेतृत्व देश की प्रगति के लिए श्रेष्ठ है। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू रिश्तेदार हैं, जिन्हें मैं 45 साल से जानता हूं, जबकि वायएस राजशेखर रेड्‌डी की भतीजी से मेरे बेटे की शादी हुई है। संबंध निभाने के लिए चाय की प्याली और प्यार काफी है।

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