राजस्थान का एक मात्र फिशरीज कॉलेज 2 शिक्षकों के भरोसे:कॉलेज में पीजी और पीएचडी स्थगित कर रखे, छात्र बोले खून से खत लिखेंगे, वीसी बोले जल्द अप्वाइंटमेंट्स

उदयपुर में संचालित राजस्थान का एक मात्र फीशरीज कॉलेज में इन दिनों पढ़ाने वालों की कमी है। सबसे अहम बात यह है कि टीचिंग स्टाफ की बात करें तो यह कॉलेज दो शिक्षकों के भरोसे चल रहा है। कॉलेज के ​भविष्य को लेकर अभी से चिंता है कि ऐसा ही रहा तो आगे कॉलेज का क्या होगा। इस बारे में महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MPUAT) के कुलपति का कहना है कि पदों पर भर्ती की जाएगी। अभी रिटायर्ड शिक्षक पढ़ा रहे है
इस कॉलेज में अभी तीन रिटायर्ड शिक्षक पढ़ा रहे है। इसमें डा. एल.एल. शर्मा और डा. एस.के. शर्मा तथा डा. बी.के. शर्मा शामिल है। बी.के. शर्मा को नि:शुल्क सेवाएं दे रहे है। कॉलेज के स्टूडेंट का दर्द छात्र बोले अब खून से पत्र लिखेंगे
अखिल भारतीय कृषि छात्र संघ के महाविद्यालय अध्यक्ष अनिल सिंह शेखावत बताते है कि हमने विधायकों से लेकर सरकार तक हमारी मांग भेजी है लेकिन अभी तक इस पर ध्यान नहीं दिया गया है। हम कलेक्टर और कुलपति को भी हमारी परेशानी से अवगत करा चुके है। अब हम खून से लिखे पत्रों के जरिए सरकार तक अपनी पहुंचाने का आंदोलन शुरू करेंगे। हम यहां आए तब से संघर्ष कर रहे
छात्र किशन मिर्धा कहते है कि हम यहां फर्स्ट ईयर में आए 2021 में आए थे तब से हम बार-बार प्रयास कर रहे हैं लेकिन अभी तक हमें इस कॉलेज में जो कमियां है उसको दूर करने पर काम नहीं किया है। ICAR से मान्यता पर संकट के बादल मंडरा रहे एलुमनाई एसोसिएशन के भावेश चौधरी ने चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि शिक्षकों की नियुक्ति के अभाव में महाविद्यालय की ICAR से मान्यता और छात्रों के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। फैकल्टी की कमी के कारण महाविद्यालय में पीजी और पीएचडी कोर्सेस को निलंबित करने से राज्य के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए अन्य जगह का रुख करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि इसका दुष्प्रभाव राज्य में मत्स्य एवं जलीय पर्यावरण आधारित शोध कार्यों पर भी पड़ रहा है। जलवायु आधारित मछली बीज चयन, उपयुक्त मत्स्य प्रजातियों के आवास, एकीकृत मछली पालन, और कम कृषि लागत में उत्पादन बढ़ाने जैसी तकनीकों पर शोध रुक गया है। देश में जहाँ एक ओर मत्स्य पालन आधारित तकनीकों का विकास चरम पर है, वहीं राजस्थान में शोध के अभाव से भविष्य में विकट परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। वीसी बोले पद रिन्यूअल करवा दिया, जल्द करेंगे अप्वाइंटमेंट्स
MPUAT के वाइस चांसलर प्रो. अजीत कुमार कर्नाटक ने दैनिक भास्कर को बताया कि इस कॉलेज को हमारे कृषि महाविद्यालय में एक हमारा लिमनोलॉजी करके सब्जेक्ट था तो उसे हटके बना है। इसमें जो है प्राध्यापक और अध्यापक के पद इसमें थे नहीं। लिमनोलॉजी के जो पांच पद थे वे सरकार ने समाप्त कर दिए थे। हमने उनको रिन्यूअल करा दिया है और वे पांच पद हमे मिल जाएंगे। जैसे ही हमारा प्रबंधन परिषद का गठन हो जाएगा तो उन पदों पर हम नए अप्वाइंटमेंट्स कर देंगे। जानिए कॉलेज के बारे में
MPUAT के राजस्थान कृषि महाविद्यालय के लिम्नोलॉजी एवं मत्स्य विभाग को एमपीयूएटी के प्रबंधन बोर्ड द्वारा 15 नवंबर, 2003 को आयोजित बैठक में मत्स्य महाविद्यालय का दर्जा दिया गया था। बीएफएससी के पहले बैच को 2004 में प्रवेश दिया गया। कॉलेज की स्थापना के लिए राजस्थान सरकार से 2010 में स्वीकृति मिली और सत्र 2010-2011 के लिए यूजी और पीजी के नए बैचों को प्रवेश दिया गया था। इस कॉलेज में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर मत्स्य पालन में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लक्ष्य के साथ शुरूआत की गई थी।

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