भास्कर न्यूज | अंबिकापुर छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के कर्मचारी अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर पिछले 28 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। सरकार की ओर से कोई ठोस पहल न होने से नाराज कर्मचारियों ने अब राज्यपाल के नाम ज्ञापन तैयार कर इच्छा मृत्यु की मांग की है। आने वाले दिनों में राज्य के 33 जिलों से हजारों की संख्या में कर्मचारी राजधानी रायपुर में एक बड़ी रैली निकालेंगे और राज्यपाल को यह ज्ञापन सौंपेंगे। कर्मचारियों की मुख्य मांगों में नियमितीकरण और वेतन विसंगति दूर करना शामिल है। उनका आरोप है कि वे लंबे समय से इन मांगों को लेकर सरकार से आग्रह कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। हड़ताल के दौरान उन्होंने कई तरह के प्रदर्शन किए, फिर भी सरकार ने कोई ठोस निर्णय नहीं लिया। स्वास्थ्य मंत्री ने मौखिक रूप से पांच मांगों पर सहमति जताई है, लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें लिखित आश्वासन चाहिए, जो अब तक नहीं मिला है। पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल के नए भर्ती प्रक्रिया शुरू करने और नए लोगों को अवसर देने के बयान ने कर्मचारियों की नाराजगी और बढ़ा दी है। कर्मचारियों का आरोप है कि इतने वर्षों से सेवा देने के बावजूद सरकार उन्हें अनदेखा कर रही है। उनका कहना है कि सरकार को पुराने कर्मचारियों की सेवाओं को महत्व देना चाहिए, न कि नए लोगों को अवसर देने की बात करनी चाहिए। एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल का राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा असर पड़ा है। कई स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज और नियमित गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, जिससे आम जनता को काफी परेशानी हो रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस स्थिति को कैसे संभालती है और क्या वह कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करती है या नहीं। स्वास्थ्य विभाग के सचिव ने अनुपस्थित कर्मचारियों पर कार्रवाई की दी चेतावनी इस बीच, स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारा ने सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएमएचओ) को पत्र भेजा है। पत्र में कहा गया है कि एनएचएम के कई कर्मचारी लंबे समय से अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित हैं। इसे देखते हुए, सचिव ने 16 सितंबर तक सभी अनुपस्थित कर्मचारियों को काम पर लौटने का अंतिम मौका दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 16 सितंबर तक कर्मचारी वापस नहीं आते हैं, तो उन्हें एक महीने का नोटिस देकर नौकरी से निकाल दिया जाएगा। सचिव ने कहा कि कर्मचारियों की यह लापरवाही न केवल उनके कर्तव्यों की अवहेलना है, बल्कि आमजन को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के मानवीय दृष्टिकोण से भी अस्वीकार्य है। उन्होंने याद दिलाया कि इससे पहले भी 18 अगस्त को सभी अनुपस्थित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर 29 अगस्त तक वापस आने को कहा गया था, जिसके बाद भी कई कर्मचारी अनुपस्थित रहे।


