सुप्रीम कोर्ट ने खजुराहो के जवारी (वामन) मंदिर में भगवान विष्णु की 7 फीट लंबी खंडित मूर्ति की बहाली की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि यह मूर्ति मुगलों के आक्रमणों के दौरान खंडित हो गई थी और तब से यह इसी हालत में है। याचिकाकर्ता ने श्रद्धालुओं के पूजा करने के अधिकार की रक्षा करने और मंदिर की पवित्रता को पुनर्जीवित करने के लिए सर्वोच्च अदालत से हस्तक्षेप की मांग की। इस पर मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने कहा- जाओ और देवता से खुद कुछ करने के लिए कहो। तुम कहते हो कि तुम भगवान विष्णु के कट्टर भक्त हो तो जाओ और प्रार्थना करो। यह एक पुरातात्विक स्थल है और एएसआई को अनुमति देनी होगी। माफ करना…। वहीं, मामले में याचिकाकर्ता राकेश दलाल ने इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए इसे अपनी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया है। राकेश के मुताबिक, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रतिमा जिस स्थिति में है, उसी में रहेगी। भक्तों को पूजा करनी है तो वे दूसरे मंदिर जा सकते हैं। बीजेपी सरकार होने के बावजूद यह स्थिति दुखद
याचिकाकर्ता राकेश दलाल ने बताया कि उन्होंने 13 जून को यह जनहित याचिका दायर की थी, जिसमें मुगलों के आक्रमण के दौरान खंडित हुई इस मूर्ति को बदलकर नई मूर्ति स्थापित करने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर उन्होंने निराशा जताई। जीर्णोद्धार की मांग, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन भी किया था
जवारी मंदिर के गर्भगृह में स्थापित भगवान विष्णु की 7 फीट ऊंची मूर्ति का सिर नहीं है। कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने इसके जीर्णोद्धार की मांग उठाई है। राकेश दलाल ने इस मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन भी किया था और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को ज्ञापन सौंपा था। जानकारों के मुताबिक, मंदिर का निर्माण लगभग 1050-1075 ईस्वी में किया गया था। मंदिर का निर्माण भले ही एक हजार साल पहले हुआ, लेकिन आज भी यह अपनी अनोखी बनावट के लिए जाना जाता है। वामन मंदिर खजुराहो के प्रमुख मंदिरों में से एक है। मंदिर की प्रतिमा खंडित होने की वजह से इसकी पूजा नहीं की जाती है। दुनिया में कहीं पर भी वामन मंदिर जैसा दूसरा मंदिर मौजूद नहीं है, जहां भगवान विष्णु के इतने अवतारों को दिखाया गया हो, साथ ही मंदिर के गर्भगृह में देखने पर ऐसा प्रतीत होता है कि यहां पानी ही पानी भरा है। इस मंदिर का निर्माण भी चंदेल राजाओं ने एक हजार साल पहले कराया था। मंदिर खजुराहो के पूर्वी मंदिर में आता है। साथ ही खजुराहो का यह पहला मंदिर है, जिसे साइड व्यू से पूरा देखा जा सकता है. क्योंकि मंदिर का मुख्य द्वार साइड व्यू से शुरू होता है


