मजदूर के पास कार, मिस्त्री इनकम टैक्स रिटर्न भर रहा:सरकारी लिस्ट में गड़बड़ी, फ्री राशन स्कीम की सूची से पात्रों के नाम कटने की नौबत

किसान को व्यापारी बता दिया गया। स्कूटी रखने वाला मजदूर फोर व्हीलर का मालिक। 500 रुपए दिहाड़ी पर काम करने वाला इनकम टैक्स भर रहा। ऐसी गड़बड़ियां सामने आई हैं गिव अप अभियान के तहत केंद्र सरकार से जारी हुई सार्वजनिक वितरण प्रणाली (IMPDS) की लिस्ट में। लिस्ट के अनुसार, झुंझुनूं जिले में 139 लोग ऐसे हैं, जिनकी उम्र 18 से कम हैं लेकिन, वे घर के मुखिया हैं। वहीं 100 साल से ज्यादा उम्र के 90 लोग हैं जो योजना का लाभ ले रहे हैं। योजना का लाभ रहे लोगों को जब ये पता चला तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। रसद विभाग के ऑफिस पहुंचे। खुद को गरीब बताने के हर संभव डॉक्युमेंट्स लगाए। अभी भी डर है कि अगर किसी महीने विभागीय गड़बड़ी के चलते राशन न आया तो गुजारा कैसे चलेगा? भास्कर ने लोगों को दर्द जाना। साथ ही समझने की कोशिश की कि ये गड़बड़ी हुई कैसे? पहले पढ़िए पात्र लोगों का दर्द…
झुंझुनूं के गिड़ानिया गांव के कमलेश कहते हैं- मैं मजदूर हूं। 6 महीने से बीमार हूं। काम पर भी नहीं जा पा रहा। घर में मेरे अलावा कोई कमाने वाला नहीं है। विभाग की सूची में मुझे कार मालिक बता दिया। विभाग ने नोटिस दिया है। मेरी कार खरीदने की हैसियत नहीं है। 3 साल पहले बच्चों को स्कूल छोड़ने के लिए स्कूटी ली थी। इसके अलावा मेरे पास कुछ नहीं है। अभी के ये हालात हैं कि घर में रोटी का जुगाड़ भी मुश्किल हो गया है। अब एप्लिकेशन देकर खुद को योजना में पात्र बताया है। डीलर ने बताया- जल्दी जाओ गेहूं आना बंद हो जाएगा
खुडोत गांव के विकास मजदूरी कर घर चलाते हैं। उन्होंने बताया- मेरे पास न गाड़ी है और न ही मेरी आय 6 लाख से ज्यादा। खेती-बाड़ी कर गुजारा करते हैं। 3 दिन पहले राशन डीलर ने बताया कि लिस्ट में आपके नाम गाड़ी बताई गई है। जल्दी ही आपके नाम आने वाला गेहूं बंद हो जाएगा। इसके बाद मैं दौड़ा-दौड़ा विभाग गया और वहां जाकर योजना से जुड़े दस्तावेज दिए। मेरे पास गाड़ी तो क्या साइकिल भी नहीं
ऐसा ही दर्द इंडाली निवासी मनोज कुमार का है। कहते हैं- मैं नरेगा में मेट का काम करके अपने परिवार का गुजारा करता हूं। जैसे-तैसे खाद्य योजना में नाम जुड़वाया था। हमारी तो आमदनी ही इतनी है कि बस गुजारा चल जाता है। घर खर्च निकल जाता है। कभी-कभी तो बच्चों की फीस भरना भी मुश्किल हो जाता है। राशन डीलर ने जब बताया कि लिस्ट में मेरे नाम से एक गाड़ी दर्ज है तो मेरे तो पैरों से जमीन सरक गई। मुझे लगा अब तो राशन के लाले पड़ जाएंगे। मेरे पास गाड़ी तो क्या साइकिल भी नहीं है। इस तरह की गलतियों के कारण गरीब परिवार योजनाओं से वंचित हो जाते हैं। सरकार को असल स्थिति की जांच कर मजदूर तबके के हक में फैसला करना चाहिए। दिहाड़ी मजदूर को बताया कार मालिक
इंडाली निवासी मुकेश ने बताया कि वह मजदूरी करते हैं। काम के लिए आने-जाने के लिए मोटरसाइकिल ले रखी है। इसके अलावा कोई वाहन नहीं है। विभाग अगर सिर्फ मोटरसाइकिल को आधार बनाकर उसकी आय अधिक दिखा रहा है, तो यह पूरी तरह गलत है। वहीं लिस्ट में उन्हें रिटर्न भरने वाला भी बताया है। ऐसी ही कहानी आनंद कुमार कांटीवाल की भी है। उन्हें भी कार मालिक दिखा कर नोटिस देने की तैयारी की जा रही है। आनंद दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। उनके पास कोई वाहन ही नहीं है। ग्राफिक में देखिए कौन होंगे इसके पात्र अब पढ़िए कैसे हुई गड़बड़ी
केंद्र सरकार ने IMPDS पोर्टल पर बने राशन कार्डों के दस्तावेजों का विश्लेषण किया था। आधार, पैन, वाहन और आयकर से जुड़े रिकॉर्ड को आपस में मिलाया गया। इसमें लोन लेने के लिए भरा ITR आयकरदाता की श्रेणी में आ गया। वहीं स्कूटी नंबर को कार की कैटेगरी में डाल दिया गया। ऐसे में जब फाइनल लिस्ट तैयार हुई तो कई खामियां सामने आईं। मामले को लेकर रसद अधिकारी निकिता राठौड़ ने कहा- केंद्र से लिस्ट आई है, इसमें जांच कर रहे हैं। रसद विभाग पहुंच रहे ग्रामीण
करीब डेढ़ महीने पहले सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के एकीकृत प्रबंधन (IMPDS) ने खाद्य सुरक्षा योजना में गिव अप अभियान के तहत अपात्र लोगों की सूची जारी की थी। खेती करने वाले किसान को व्यापारी बताया तो मजदूर की आय 6 लाख से ज्यादा बता दी। सेकेंड हैंड बाइक रखने वाले मजदूर को कार मालिक बता दिया। मामला सामने आने के बाद ऐसे परिवार एप्लीकेशन लेकर रसद विभाग ऑफिस पहुंच रहे हैं। साथ ही, गुहार लगा रहे हैं कि हमारे नाम पर न तो कोई फोर व्हीलर हैं और न ही हम कोई व्यापारी। अधिकारी बोले- किसी को आपत्ति हो तो जांच करवा लें
पूरे मामले को लेकर जिला रसद अधिकारी निकिता राठौड़ ने भास्कर को बताया- फिलहाल सिर्फ वेरिफिकेशन चल रहा है। किसी का राशन बंद नहीं हुआ है। केंद्र से जो ऑन रिकॉर्ड लिस्ट आई है, उसी के आधार पर जांच हो रही है। कई लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने लोन लेने के लिए आईटीआर भर दिया था, उनका नाम सूची में आया। अगर किसी को लगता है कि उसने कभी रिटर्न नहीं भरा तो वह जांच कराए। सरकार को रिपोर्ट भेजी जाएगी और निर्णय के बाद ही कार्रवाई होगी। फिलहाल राशन बंद नहीं होंगे। नोटिस जारी किए हैं। अगर किसी को आपत्ति हो तो वह विभाग आकर एप्लिकेशन दे सकता है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *