सिविल हॉस्पिटल पा​र्किंग 4 गुना वसूली वाली पार्किंग

सिविल हॉस्पिटल लुधियाना के परिसर को अवैध पार्किंग के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। यहां की पार्किंग का फायदा आम लोगों, हॉस्पिटल स्टाफ और कर्मचारियों से ज्यादा आसपास के लोग उठाते हैं। पार्किंग ठेकेदार अपनी सांठ-गांठ से बाहरी लोगों की गाड़ियां यहां लगवाते हैं। इसकी कई शिकायतें सिविल हॉस्पिटल प्रबंधन को भी हो चुकी हैं और कई बार मामला उठा भी है। लेकिन इसका पक्का हल आज तक नहीं हो सका। 4 गुनी फीस देने वाली इन गाड़ियों की जगह भी पक्की है। हॉस्पिटल में इलाज करवाने या स्टाफ को भले ही पार्किंग की जगह न मिले लेकिन इन गाड़ियों को कोई हटा नहीं सकता। आखिरी बार यह गाड़ियां हॉस्पिटल से तभी हटी थी जब आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल, सीएम भगवंत मान का दौरा था। उसके अलावा इन गाड़ियों को हटवाने की कार्रवाई न ही हॉस्पिटल प्रबंधन ने की है और न ही विभाग के अधिकारियों ने। भास्कर रिपोर्टर ने एक महीने के दौरान छुट्टी के दिन या छुट्टी के बाद हॉस्पिटल की पार्किंग की जांच की। अगर कोई सामने ही लगे रेट लिस्ट का पूछे तो रेट लिस्ट के अनुसार फीस लेकर मामले को शांत करवा लिया जाता है। 60 से ज्यादा ऐसी गाड़ियां जो हर बार दिखीं सिविल हॉस्पिटल की पार्किंग में 60 से ज्यादा ऐसी गाड़ियां दिखीं जो तीन अलग-अलग दिनों की भास्कर टीम की जांच के दौरान दिखीं। इनकी जांच पर पता चला कि यह हॉस्पिटल के आसपास के लोगों की गाड़ियां हैं। जिनके घर में पार्किंग की जगह नहीं है और वो महीने के चार्ज पर यहां गाड़ियां खड़ी करते हैं। हॉस्पिटल में काम करने वालों के अनुसार कई बार ठेकेदार द्वारा उनकी गाड़ियों को अस्पताल के बाहर लगवाया जाता है। बिना टायर की थार महीनेभर से खड़ी हॉस्पिटल में सिर्फ पार्किंग ही अवैध नहीं हो रही। बल्कि इन गाड़ियों को साफ रखने के लिए यहां धुलती भी हैं। छुट्टी के दिन यहां गाड़ियों के धोने की सुविधा भी मिलती है। कई वीआईपी नंबर की गाड़ियां भी यहां हैं। वहीं, एक था बिना टायरों के महीने से भी ज्यादा समय से यहां खड़ी रहती है। डॉक्टर्स के लिए एमरजेंसी की तरफ पार्किंग की जगह रखी गई है। लेकिन गाड़ियां ज्यादा होने के कारण वहां जगह कम होती है। ऐसे में डॉक्टर्स भी यहां-वहां अपनी गाड़ियां खड़ी करते हैं। पार्किंग ठेकेदार व उनके कारिंदों द्वारा अपने चहेतों की गाड़ियों को खड़ा करने के लिए कई बार डॉक्टर और स्टाफ की गाड़ियों को टो भी करवाया जाता रहा है। जिसकी शिकायत भी हो चुकी है। 5 की जगह 20 तो 10 की जगह 40 की वसूली मई में पार्किंग का टेंडर 51 लाख 51 हजार 786 रुपए में दिया गया। ताकि हॉस्पिटल स्टाफ और आम लोगों को परिसर में ही बिना वाहनों की चोरी या अन्य डर के वाहन लगाने की सुविधा मिल सके। लेकिन यहां सुविधा तो क्या ही मिलनी है उल्टा कई बार कर्मचारियों के ही वाहन टो करवा दिए जाते हैं। यही नहीं, जहां आम लोगों की सहूलियत के अनुसार पार्किंग की फीस भी तय है। जिसमें साइकिल के लिए मुफ्त पार्किंग, टू-व्हीलर के लिए 5 रुपए, फोर व्हीलर के लिए 10 रुपए की पार्किंग सिंगल एंट्री के लिए है। 24 घंटे की मल्टीपल एंट्री के लिए टू-व्हीलर के लिए 10 रुपए और फोर व्हीलर के लिए 30 रुपए की फीस तय है। वहीं, आम लोगों को पार्किंग के दोगुने रेट देने पड़ते हैं। जिसमें एक्टिवा से सिंगल एंट्री के लिए 20 तो फोर व्हीलर से 30-40 रुपए ले रहे। एंबुलेंस को भी नहीं मिलता रास्ता: अस्पताल में पार्किंग की जगह होने के बावजूद भी कई वाहन सड़क पर ही खड़े रहते हैं। इसके कारण एंबुलेंस को भी रास्ता नहीं मिलता और कई बार एमरजेंसी केस होने पर भी मरीजों को इंतजार करना पड़ता है। हॉस्पिटल परिसर में सड़क के दोनों तरफ वाहन खड़े रहते हैं। जिसके कारण एमरजेंसी व्हीकल के जाने में परेशानी होती है। आखिरी बार गाड़ियां तब हटी थीं जब अरविंद केजरीवाल, सीएम भगवंत मान आए थे ज्यादा पैसे लेकर पार्किंग के अलावा बीच रास्ते में गाड़ियां खड़ी करवाई जा रहीं, जिससे मरीजों को आने का रास्ता नहीं मिलता।

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