मप्र हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच ने 5.10 करोड़ के जमीन अधिग्रहण घोटाले के मास्टरमाइंड रूप सिंह परिहार की जमानत याचिका खारिज कर दी। जस्टिस राजेश कुमार गुप्ता ने आदेश की कॉपी प्रिंसिपल रजिस्ट्रार (विजिलेंस) को भेजते हुए कहा कि इसे चीफ जस्टिस के सामने रखा जाए, ताकि शिवपुरी में पदस्थ प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश विवेक शर्मा के खिलाफ जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सके। हाई कोर्ट ने कहा- विवेक शर्मा ने गंभीर धाराएं हटाकर केवल आईपीसी की धारा 406 में आरोप तय किए, ताकि आरोपी को जमानत मिल सके। जबकि केस में धारा 409, 420, 467, 468, 471 और 120-बी जैसी धाराएं लागू होती हैं, जिनमें 10 साल तक की सजा है। धारा 406 में अधिकतम 3 साल की सजा है। सरकारी वकील ने कहा कि आरोपी न तो किसान है और न ही उसकी जमीन का अधिग्रहण हुआ। बावजूद इसके करोड़ों रुपए उसके खाते में आए। बचाव पक्ष ने खुद को फंसाए जाने की दलील दी, जिसे हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया।
आरोपी रूप सिंह परिहार 2023 में आउटसोर्स कंप्यूटर ऑपरेटर भर्ती हुआ। किसानों को 6.55 लाख मिलने थे, पर 25.55 लाख आठ लोगों के खातों में डाले गए। जांच में रूप सिंह के खाते में 36.76 लाख, पत्नी रचना को 37.08 लाख और रिश्तेदारों को लाखों रुपए ट्रांसफर मिले। 2024 में केस दर्ज हुआ और जुलाई 2024 में वह गिरफ्तार हुआ।


