कुड़मी को एसटी सूची में शामिल करने की मांग पर उठे विवाद पर आदिवासी कुड़मि समाज ने अपना पक्ष रखा है। कहा कि कुड़मी आदिवासी थे और हमेशा रहेंगे। अगर जरूरत पड़ी, तो डीएनए टेस्ट के लिए भी तैयार हैं। मंगलवार को प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता कर कुड़मी नेताओं ने कहा कि जो लोग विरोध कर रहे हैं, वही बताएं कि आखिर 1951 तक कुड़मी एसटी सूची में शामिल कैसे रहे? कहा, सरकार के जनगणना पदाधिकारियों और जनजाति शोध संस्थानों के गलत मार्गदर्शन के कारण कुड़मी महतो जनजातीय समुदाय को उनके संवैधानिक हक अधिकार से वंचित किया जा रहा है। प्रेस वार्ता में आदिवासी कुड़मी समाज, कुड़माली छात्र संगठन, आदि कुड़मी युवा शक्ति के पप्पू कुड़मी, रतन महतो सत्यार्थी, मणिलाल महतो, तालेश्वर महतो, संतोष टिड्डूवार, कंचन महतो आदि शामिल थे।


