अमृत भारत योजना उन्नयन योजना में रेलवे स्टेशन पर फुट ओवर ब्रिज (एफओबी, पैदल पुल) के लिए बनाई गई जानलेवा सीढ़ियों के मामले में रेलवे के अफसर कंस्ट्रक्शन कंपनी को बचाने का काम कर रहे हैं। जिला विकास समन्वय निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में 3 बार और सांसद-अधिकारियों के निरीक्षण में निर्देशों के बाद भी ये स्थिति है कि सीढ़ियों में कोई सुधार नहीं हुआ। लोगों की परेशानियों को दरकिनार करते हुए अधिकारी कंस्ट्रक्शन कंपनी केपीसी प्रोजेक्ट्स लिमिटेड की कमी को छिपाने के लिए तर्क दे रहे हैं कि कॉनकोर्स का काम पूरा होने के बाद केवल 20% ही यात्री प्लेटफार्म बदलने के लिए पैदल पुल का उपयोग करेंगे। 50 हजार यात्रियों के लोड वाले इस स्टेशन पर सुविधाओं को लेकर अधिकारी ये समझाने का प्रयास कर रहे हैं कि सीढ़ियां ऐसी ही रहने दी जाएं, इनमें सुधार या बदलाव की जरुरत नहीं है। ऐसे समझें पूरा मामला 1 दिशा की बैठक में 5 अप्रैल को इन सीढियों की समस्या सदस्यों ने रखी। जिसमें बताया गया कि जो सीढ़ी बनी हैं वह काफी संकरी हैं। साथ ही इनकी ऊंचाई काफी अधिक कर दी गई है। जिस कारण अन्य प्लेटफार्म पर जाने के लिए यात्रियों को खड़ी सीढियां चढ़नी पड़ती हैं। बैठक में रेलवे अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सीढ़ियों में सुधार कराया जाए। 2 कलेक्ट्रेट में कुछ दिन पहले 11 सितंबर को हुई दिशा की बैठक में एक बार फिर इन सीढ़ियों का मुद्दा उठा। जिसमें इस बात पर भी आपत्ति उठी कि जब पिछली बैठक एवं निरीक्षणों में सुधार के निर्देश दिए गए थे। तो उसका काम क्यों नहीं कराया गया। वहीं रेलवे अधिकारियों ने जवाब पेश कर कहा है कि पैदल पुल का निर्माण अनुमोदित नक्शों के अनुसार किया गया है और कॉनकोर्स का निर्माण होने के बाद सिर्फ 20 प्रतिशत यात्री ही प्लेटफार्म बदलने के लिए पैदल पुल का उपयोग करेंगे। 3 रविवार को रेलवे स्टेशन के निरीक्षण व सोमवार को कलेक्ट्रेट में हुई बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी इन सीढ़ियों की चौड़ाई बढ़ाने के लिए कहा है। हालांकि, इसके बाद भी रेलवे के अधिकारियों की तरफ से सीढ़ी चौड़ीकरण को लेकर कोई हलचल शुरू नहीं हुई है और न कोई प्रतिक्रया दी गई है। सीढ़ियों की चौड़ाई बढ़ाने का मामला जिला विकास समन्वय निगरानी समिति (दिशा) के अध्यक्ष सांसद व कलेक्टर एवं अन्य अधिकारियों को गलत जानकारी देकर रेलवे के अफसर बचने की गली निकाल रहे हैं। दरअसल, रेलवे स्टेशन पर सीढ़ियों को लेकर समस्या बनी हुई है और उनमें सुधार के लिए समिति द्वारा बार-बार निर्देश दिए जा रहे हैं। लेकिन अधिकारियों ने जो जवाब समिति को दिया है। उसमें सीढ़ियों की बात ही नहीं की, बल्कि कॉनकोर्स (खुला एरिया, जिसमें काफी संख्या में लोग जुट पाते हैं) के पूरे होने पर पैदल पुल का उपयोग कम होने का दावा किया है। जबकि समिति ने पैदल पुल और कॉनकोर्स को लेकर न कोई सवाल किया और न कोई निर्देश दिए। रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ तय करेंगे ^दिशा की बैठक में दिए गए जवाब की अभी जानकारी नहीं है। लेकिन पैदल पुल की सीढियों को लेकर सर्वे करा रहे हैं। जिसकी रिपोर्ट आने के बाद कुछ तय किया जा सकेगा। – सुधीर कुमार पटेल, डिप्टी चीफ इंजीनियर/ रेलवे स्टेशन ग्वालियर


