3 साल की पोती को बचाने 67 साल की दादी सियार से भिड़ गई। लकड़ी लेकर उसकी और दौड़ी और सियार को भगा दिया। खेत के किनारे बैठकर खेल रही मासूम को सियार ने सिर से जबड़े में दबोच लिया था। वह उसे सिर से पकड़कर उठा कर ले जाने लगा था। जैसे ही मासूम रोई पास ही काम कर रही दादी ने देखा और तुरंत उसे बचाने दौड़ी। इसके बाद मासूम को अस्पताल पहुंचाया गया। सियार की पकड़ से बच्ची के सिर में उसके दांत गढ़ गए। सिर पर 5 टांके आए हैं इसके साथ ही सिर की चमड़ी भी उधड़ गई है। इमरजेंसी वॉर्ड में उसका इलाज जारी है। मामला कोटा के इटावा ग्रामीण क्षेत्र के अयाना थाना दुर्जनपुरा गांव का रविवार शाम 5 बजे का है। इटावा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक उपचार के बाद कोटा के एमबीएस हॉस्पिटल में रेफर कर दिया गया था। बच्ची के सिर को जबड़े में दबोचा बच्ची के ताऊ सत्यनारायण गुर्जर ने बताया- वे दुर्जनपुरा गांव के रहने वाले हैं, यही खेत भी है। रविवार शाम साढ़े 5 बजे के करीब लक्षिता (3) अपनी दादी द्वारिकया बाई (67) के साथ खेत पर चने की फसल को देखने गई थी। खेत पर पहुंचने के बाद दादी ने लक्षिता को खेत में ही एक कोने में बैठा दिया और वहीं पास में फसल देखने लगी। लक्षिता इस दौरान खेत में ही खेल रही थी। अचानक झाड़ियों में घात लगाकर बैठे एक सियार ने उस पर हमला कर दिया। लक्षिता पर सीधे आंख के ऊपर सिर को दबोच लिया था। हमले से लक्षिता रोने लगी और छटपटाने लगी थी। उसकी आवाज सुनकर दादी ने जैसे सियार को उसे मुंह में दबाए देखा तो खेत में पास में ही रखी लकड़ी उठा कर उसकी और दौड़ी। इमरजेंसी वॉर्ड में चल रहा इलाज सत्यनारायण गुर्जर ने बताया- दादी जोर से चीखते हुए लकड़ी जमीन पर पटकते हुए करीब पहुंची तो सियार घबरा कर लक्षिका को छोड़ कर भाग निकला। इसके बाद तुरंत उन्होंने घर पर सूचना दी। इसके बाद लक्षिता को इटावा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। जहां प्राथमिक उपचार के बाद ड्यूटी डॉक्टर ने कोटा के एमबीएस हॉस्पिटल में रेफर कर दिया। कोटा में इमरजेंसी वार्ड में लक्षिता का इलाज चल रहा है। इलाज के दौरान सिर में पांच टांके आए हैं, सियार के दांतों के निशान भी हैं। बच्ची के पिता हरिप्रकाश किसान हैं। डॉक्टर बोले- लूज टांके लगाए गए एमबीएस हॉस्पिटल सीनियर प्रोफेसर सर्जिकल डॉक्टर नीरज देवांदा ने बताया- बच्ची के सिर में काफी चोट आई है सिर की चमड़ी को काफी नुकसान पहुंचा है। बच्ची के आंख नाक और सिर के अंदर कोई चोट नहीं लगी है। सीटी स्कैन करवाया था। सिर में चोट है और मरीज को एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाए हैं। जंगली जानवर से रेबीज का खतरा रहता है और इसके सैंपल लिए हैं। एंटीबायोटिक दवाइयां दी है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए दवाई दे रहे हैं। मरीज के चमड़ी को जोड़ने के लिए ढीले टाके लगाए गए हैं। ताकि चमड़ी अपनी जगह जुड़ सके। वाइल्ड एनिमल बाईट में लूज स्टिच लगाकर ड्रेसिंग कर दी गई है। इसके आज अगर इंफेक्शन नहीं होता है तो स्क्रीन कवरेज के लिए बाद में टांके लगाते हैं।


