लुधियाना के जगराओं में पार्षद एडवोकेट हिमांशु मलिक पर दर्ज कथित झूठा मामला अब पुलिस के लिए परेशानी का सबब बन गया है। बार एसोसिएशन ने अपने सदस्य को न्याय दिलाने के लिए मोर्चा खोल दिया है, जिसके चलते लगातार तीसरे दिन भी अदालती कामकाज पूरी तरह ठप रहा। वकीलों का आरोप है कि पुलिस राजनीतिक दबाव में झूठा मामला दर्ज कर अब इसे लटका रही है। जानकारी के अनुसार, यह मामला लगभग दो महीने पहले नगर कौंसिल के मीटिंग हॉल में हुई एक घटना से जुड़ा है। यहां आजाद पार्षद एडवोकेट हिमांशु मलिक और भाजपा पार्षद सतीश कुमार पप्पू के बीच कहासुनी हुई थी। इस दौरान पार्षद मलिक ने भाजपा पार्षद सतीश कुमार को पीछे धकेल दिया था। घटना के बाद दोनों पार्षद अस्पताल में भर्ती हुए और एक-दूसरे के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने 45 दिनों की जांच के बाद पार्षद एडवोकेट हिमांशु मलिक के खिलाफ धारा 115(2), 296, 351(2) के तहत मामला दर्ज किया। दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक रंजिश
भाजपा पार्षद ने अपनी शिकायत में जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल के गंभीर आरोप लगाए थे, जो पुलिस जांच में झूठे पाए गए। पुलिस ने अपनी ही एफआईआर में स्पष्ट रूप से लिखा है कि दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक रंजिश है और दोनों पर अपराध रोकने के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए थी। इसके बावजूद, पुलिस ने कथित राजनीतिक दबाव के चलते केवल हिमांशु मलिक पर मामला दर्ज किया। इस कार्रवाई का पता चलते ही बार एसोसिएशन ने पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और अपने एडवोकेट को न्याय दिलाने की मांग की। इसी के चलते कोर्ट परिसर में तीसरे दिन भी वकीलों की हड़ताल जारी रही, जिससे तारीख पर आने वाले लोगों और जमानत लेने वाले आरोपियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बार काउंसिल ने पुलिस को दो दिन में मामला रद्द करने का मांग पत्र सौंपा है और ऐसा न होने पर संघर्ष तेज करने की चेतावनी दी है।


