88 साल के मुनि चिन्मय सागर जी पंचतत्व में लीन:चकडोल यात्रा में उमड़े लोग, अतिशय क्षेत्र टोंक में हुआ अग्नि संस्कार

मुनि श्री चिन्मय सागर जी महाराज (88) बुधवार को आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज संघ सानिध्य में अतिशय क्षेत्र टोंक में पंचतत्व में लीन हो गए। इससे पहले उनकी चकडोल यात्रा निकाली गई। इसमें हजारों महिला-पुरुष उमड़ पड़े। मुनि श्री आचार्य आदि के जयकारे लगाए गए। जिला मुख्यालय पर इस बार वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ चतुर्मास के लिए रुके थे। आहार का त्याग कर यम संलेखना ग्रहण की उनके संघ में आचार्य श्री अजितसागर से वर्ष 1989 में दीक्षित उदयपुर निवासी मुनि श्री चिन्मय सागर जी महाराज गत दिनों से शारीरिक रूप से काफी कमजोर हो गए थे। ऐसे में उन्होंने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से निवेदन कर 13 सितंबर को चारों प्रकार के आहार का त्याग कर यम संलेखना ग्रहण की। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के श्री मुख से अरिहंत सिद्ध सुनते हुए 16 सितम्बर को समाधिमरण हुआ। मंत्रोच्चार से स्थल शुद्धि की गई आज सुबह समाधिस्थ मुनि श्री चिन्मय सागर जी का डोला विमान यात्रा वात्सल्य वारिघि पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सानिध्य में निकाली गई। वैराग्य दर्शन समाधिस्थल परिसर में मंत्रोच्चार से स्थल शुद्धि की गई। मुनि श्री की पूजन,शांतिधारा, पंचामृत अभिषेक उल्टे क्रम से प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख धरियावद के कुशल निर्देशन में गृहस्थ अवस्था के पुत्रों ओमप्रकाश, नरेंद्र, ईश्वर स्वाधीन, सरला, उषा, दीपिका, आशा, सरला, उषा, दीपिका, एवं भौंरावत परिवार द्वारा किया गया। पुण्यार्जक परिवार द्वारा दान राशि की घोषणा की गई। इस अवसर पर आचार्य श्री ने बताया कि उत्कृष्ट समाधि होने पर समाधिस्थ जीव अगले दो भव जन्म से 8 भव में निश्चित मोक्ष जाते हैं। रात्रि भर णमोकार महा मंत्र का पठन किया राजेश पंचोलिया इंदौर ने बताया कि दीक्षा गुरु की वर्ष 1990 में समाधि के बाद से मुनि चिन्मय सागर जी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के संघस्थ हुए। 36 वर्ष के संयमी जीवन में हजारों उपवास भी किए विगत 6 माह से सभी अनाज का त्याग कर एकांतर से आहार ले रहे थे। ऐसा लगता हैं कि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी द्वारा घोषित अतिशय क्षेत्र अब निर्वाण सिद्ध भूमि हो गया हैं। समाज प्रवक्ता पवन कंटान एवं विकास जागीरदार ने बताया की मुनि चिन्मय सागर जी महाराज के समाधि मरण के बाद जैन नसिया में रात्रि भर णमोकार महा मंत्र का पठन किया गया। सकल जैन समाज एवं वर्षायोग समिति के तत्वाधान में आयोजित कार्यक्रम में टोंक नगर के अतिरिक्त निवाई, जयपुर,बोली, टोडारायसिंह, किशनगढ़, धरियावद पारसोला उदयपुर, इंदौर ,असम ,गोहाटी कलकत्ता सनावद मंगाना, देवली, मालपुरा आदि राजस्थान,मध्यप्रदेश आदि राज्यों से अनेक नगरों से 5000 से अधिक भक्त पधारे। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ की करीब डेढ़ माह में दूसरी समाधि हुई है। इस मौके पर सरोज बंसल, नरेश बंसल, लक्ष्मी देवी जैन, बीना छामुनिया, टोनी आड़रा, नंद लाल संघी, मोहन लाल छामुनिया,प्रबंध समिति के अध्यक्ष पदमचंद आड़रा मंत्रीमहावीर प्रसाद देवली उपाध्यक्ष नरेंद्र फागी वात्सल्य वारिधि वर्धमान वर्षायोग समिति के अध्यक्ष भागचंद फुलेता कार्यकारी अध्यक्ष धर्मचंद दाखिया, मंत्री राजेश सर्राफ राजेश बोरदा, सुरेश संघी, पप्पू नमक, कमल सर्राफ , विनोद सर्राफ, नीटू छामुनिया सुमित दाखीया, अमित छामुनिया विनायक कल्ली सीटू RT, संजय संघी, पारस संघी, उमेश संघी, ओम ककोड़, मुकेश बरवास, ऋषभ नमक, अक्षत आड़रा, गौरव टोरडी, सोहम कँटान, आदि लोगों मौजूद रहे

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