जोधपुर के काली बेरी क्षेत्र में बने अक्षरधाम मंदिर की 25 सितंबर को प्राण प्रतिष्ठा होगी। कार्यक्रम में अंटार्कटिका महाद्वीप को छोड़कर विश्व के सभी छह महाद्वीपों से हजारों भक्त और संत शामिल होंगे। इस प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव की तैयारियां की जा रही हैं, जिन्हें आईआईटीयन, आईआईएम पास आउट, डॉक्टर और इंजीनियर संत अंतिम रूप देने में जुटे हैं। काली बेरी क्षेत्र में बोचासनवासी श्रीअक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बीएपीएस) द्वारा इस मंदिर का निर्माण कराया गया है। इसमें कठोर जोधपुरी पत्थर पर छह इंच तक गहरी नक्काशी की गई है। इस मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए गुरुहरि प्रकट ब्रह्मस्वरूप महंत स्वामी महाराज 19 सितंबर को जोधपुर पहुंचेंगे और यहां 25 सितंबर को मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा करेंगे। कारीगरों ने असंभव को संभव बनाया अक्षरधाम के संत ज्ञानानंद महाराज ने बताया- जोधपुरी पत्थर बेहद सख्त होता है, इस पर गहरी नक्काशी करना असंभव माना जाता था, लेकिन यहां कारीगरों ने 6 इंच तक की गहराई की नक्काशी की है। कारीगरों का यह काम असंभव को संभव करने का जीवंत उदाहरण है। 500 कारीगरों ने करीब सात साल तक दिन-रात मेहनत कर इस स्थापत्य को तैयार किया है। हजारों साल पुरानी तकनीक का पुनर्जन्म इस मंदिर की विशेषता यह है कि विशाल गुंबद और सभी पत्थर बिना कंक्रीट के खड़े हैं। प्राचीन समरांगण सूत्रधार और वास्तु कर्म प्रकाश ग्रंथों के अनुसार सभी पत्थर इंटरलॉक सिस्टम से जुड़े हुए हैं। कहीं भी लोहे या स्टेनलेस स्टील का उपयोग नहीं किया गया है, जो सदियों पुरानी भारतीय स्थापत्य तकनीक को पुनर्जीवित करता है। 281 स्तंभों का अद्वितीय वास्तु अक्षरधाम मंदिर का निर्माण कार्य 2017 से शुरू हुआ। कोविड काल के दौरान कुछ समय तक काम रुका रहा, लेकिन अब यह पूरा बन चुका है। तकरीबन 40 बीघा परिसर में 10 बीघा में मुख्य मंदिर का निर्माण हुआ है, जो जमीन से 13 फीट ऊंचे आधार पर खड़ा है। मंदिर की कुल लंबाई 181 फीट और ऊंचाई 91 फीट है। इसमें कुल 281 स्तंभ हैं, जो संपूर्ण बीएपीएस मंदिरों में अभूतपूर्व हैं। ये सभी सिरोही घाट शैली के गोलाकार स्तंभ हैं जो नीचे से चौड़े और ऊपर से संकरे होते हैं। मंदिर का आकार न तो चौकोर है और न ही आयताकार, बल्कि इसके आठ से नौ कोण हैं, जो इसे विशिष्ट आकर्षक शैली प्रदान करते हैं। उच्च शिक्षित संत समुदाय संत ज्ञानानंद महाराज के अनुसार 23 से 25 सितंबर तक आयोजित होने वाले इस तीन दिवसीय महोत्सव की सबसे अनूठी बात यह है कि यहां सेवा करने वाले संतों में आईआईटी, आईआईएम के पास आउट, डॉक्टर, इंजीनियर और उच्च शिक्षा प्राप्त व्यक्तित्व शामिल हैं। ये संत झाड़ू पोंछा से लेकर रसोई तक की छोटी से छोटी सेवा करके इस महोत्सव को सफल बनाने के लिए रात-दिन मेहनत कर रहे हैं। ऐसा विश्व में कहीं और देखने को नहीं मिलता। छह महाद्वीपों से आएंगे भक्त संत ज्ञानानंद ने बताया कि इस प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में शामिल होने के लिए जोहान्सबर्ग, पेरिस, लंदन, न्यूयॉर्क, सिडनी और दुनिया के तमाम प्रमुख शहरों से भक्त और संतगण भी आएंगे। अंटार्कटिका महाद्वीप को छोड़कर विश्व के सभी छह महाद्वीपों से लोगों का आगमन हो रहा है। इस वैश्विक उपस्थिति के लिए 35 विविध सेवा विभाग का गठन कर अलग-अलग जिम्मेदारियां भी सौंपी गई हैं। 181 कुंडीय यज्ञ में विश्व शांति का अनुष्ठान 23 सितंबर को विश्व शांति महायज्ञ के लिए 181 कुंडों का निर्माण किया गया है। प्रत्येक कुंड में 14 यजमान भक्त बैठेंगे। बीएपीएस के 200 संतों के साथ ही अन्य संप्रदायों के धर्माचार्य भी इसमें शामिल होंगे। यह महायज्ञ वर्तमान विश्व में व्याप्त वैमनस्य को देखते हुए विश्व शांति की कामना के लिए आयोजित किया जा रहा है। हजारों लोगों की एक साथ प्रसादी क्षमता मंदिर परिसर में एक साथ हजारों लोगों के भोजन-प्रसादी करने की क्षमता है। इसके अलावा, 2,500 लोगों की क्षमता वाला सभागृह और अत्याधुनिक वॉटर कूलिंग सिस्टम जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। प्रशासन का पूर्ण सहयोग प्राप्त है और किसी भी व्यवधान से बचने के लिए सूक्ष्म आयोजन किया गया है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए प्रेरणा केंद्र संत ज्ञानानंद ने बताया कि यह मंदिर केवल उपासना का केंद्र नहीं है, बल्कि मानवीय, आध्यात्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक केंद्र है। यहां भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जीवंत किया गया है। यहां दर्शनार्थियों को न केवल आध्यात्मिक शांति मिलेगी, बल्कि जीवन में वास्तविक मानव कैसे बनना है इसकी भी प्रेरणा मिलेगी। विश्व मानचित्र पर जोधपुर की नई पहचान कालीबेरी स्थित यह मंदिर जोधपुर के लिए एक नई वैश्विक पहचान बनेगा। चारों ओर शुद्ध वातावरण में यह न केवल पर्यटन बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विश्व पटल पर राजस्थान को नई ऊंचाई प्रदान करेगा। तीन दिवसीय महोत्सव का कार्यक्रम 23 सितंबर को सुबह 6:30 बजे से विश्व शांति महायज्ञ, 24 सितंबर को सुबह 6:30 बजे से महायज्ञ और दोपहर 2 बजे भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। 25 सितंबर को सुबह 6:30 बजे से मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा एवं शाम 5:30 बजे लोकार्पण समारोह संपन्न होगा। शोभायात्रा में प्रतिष्ठित होने वाली मूर्तियों को विभिन्न झांकियों और रथों में बैठाकर संपूर्ण नगर में ले जाया जाएगा।


