सनातनी परंपरा के अनुसार सनातनी धर्मावलंबियों का नया वर्ष चैत्र मास में आता है। सनातन- सनातन करने वालों को यह समझ ही नहीं आता और वे 31 दिसंबर को रात 12 बजे और उसके बाद 1 जनवरी को अंग्रेजी परंपरा का नया वर्ष बड़ी धूमधाम से मनाते हैं। लोगों को बधाइयां देते हैं, शुभकामनाएं देते हैं, भावी पीढ़ी इसे ही नया वर्ष मानती है। कई को तो सनातनी परंपरा के मासों का नाम तक मालूम नहीं होता। इसे दुर्भाग्य कहें या सौभाग्य। बालकों, युवाओं, किशोरों को किस तरह सनातनी परंपरा से परिचय कराएंगे? क्या इसी तरह थर्टी फर्स्ट मनाकर? जो कि सनातनियों का है ही नहीं। एरोड्रम क्षेत्र में दिलीप नगर नैनोद स्थित शंकराचार्य मठ इंदौर के अधिष्ठाता ब्रह्मचारी डॉ. गिरीशानंदजी महाराज ने अपने नित्य प्रवचन में सोमवार को यह बात कही। विदेशी कल्चर छोड़े, भारतीय संस्कृति अपनाएं महाराजश्री ने कहा कि सनातनी परंपरा के दिखावे के प्रचार को करने वाले दिखावे के लिए ही चैत्र मास में नया वर्ष मनाने का प्रयास करें। लोगों को भी बताएं विदेशी परंपरा से दूर रहें। तभी आपकी दिखावे की परंपरा सत्य में परिवर्तित हो सकेगी। चैत्र मास में दो ऋतुओं का संधिकाल होता है, नई ऋतु आती है, नई फसल आती है… लगता है कि हां, नया वर्ष आया है। नए वर्ष को मनाने के लिए ही चैत्र मास में आने वाला वर्ष के शुभत्व को लेकर जगत जननी मां दुर्गा की उपासना 9 दिन कर आशीर्वाद लिाया जाता है। पटाखे फोड़कर, पार्टियां मनाकर, विदेशी कल्चर को अपनाकर नया वर्ष मनाने वाले सनातनी नहीं हो सकते।


