बांसवाड़ा जिले के मोटागांव कस्बे से लापता हुए व्यापारियों को लेकर मामला गहराता जा रहा है। आरोपी हर्षित को रतलाम से डिटेन करने के बाद 48 घंटे बाद भी मामले का खुलासा नहीं हो पाया है। पुलिस का कहना है कि ई-मित्र संचालक हर्षित सेवक मुंह पर सफेद रुमाल बांधकर पिंडावल बस स्टेंड पहुंचा था और वहां से बस में बैठकर फरार हो गया। उसकी पिंडावल में मौका तस्दीक भी करवा दी गई है। मोटागांव थानाधिकारी रामसिंह का कहना है कि हादसे के समय हर्षित लसाड़ा पुल पर था, ऐसे में उसकी भूमिका को लेकर भी फिर से जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि हर्षित ने इंदौर पहुंचकर दाड़ी बनवा मुंडन करवाया था। वह डर कर यहां से भागना की बात कह रहा है। हालांकि सुरेश सोनी नदी में कैसे कूदा और हर्षित की भूमिका क्या है, इस पर नए सिरे से जांच की जा रही है। मामले में बुधावार को भी उससे पूछताछ की गई। इधर, मामले में घाटोल डीएसपी महेंद्र कुमार मेघवाल ने बताया कि मामले का गुरुवार को खुलासा होने की संभावना है। यह था मामला
जानकारी के अनुसार- मोटागांव कस्बे से 8 सितंबर सोमवार को दो व्यापारी दोस्त सुरेश सोनी और हर्षित सेवक लापता हो गए थे। 11 सितंबर गुरुवार को व्यापारी सुरेश सोनी की लाश भीलूड़ा के पास नदी में मिली। इससे लसाड़ा पुल में उनके गिरने की आशंका हुई। 12 सितंबर शुक्रवार को लसाड़ा पुल माही नदी में व्यापारी सुरेश सोनी की कार मिली। एसडीआरएफ व पुलिस ने क्रेन की मदद से कार को बाहर निकाला गया। कार की फाटक खुली हुई थी और अंदर दोनों के जूते पड़े मिले। इसके बाद हर्षित के भी नदी में बह जाने की आशंका थी। लेकिन वह घटना के 5 दिन बाद रतलाम में मिल गया। इसके बाद से ही उससे पूछताछ की जा रही है।


