बूंदी जिले के केशोराय पाटन कस्बे में शुगर मिल संचालन और ग्रामीण क्षेत्र की बिजली निजीकरण के विरोध में किसानों ने किया प्रदर्शन। चंबल नदी में उतरकर किया जल सत्याग्रह। किसान शुगर मिल पर एकत्रित हुए और रैली के रूप में के.पाटन चंबल नदी पहुचे। वहां पर नदी में उतरकर जल सत्याग्रह किया। मागे नही मानने पर आर पार की लड़ाई की घोषणा की। शुगर मिल संयुक्त किसान समन्वय समिति के प्रतिनिधि नवीन श्रृंगी ने बताया कि शुगर मिल के पुनः संचालन ओर विद्युत व्यवस्था को निजी हाथों में देने के विरोध में किसानों और युवाओं ने उग्र प्रदर्शन किया। किसान शुगर मिल में एकत्रित हुए और रैली के रूप में के.पाटन चंबल नदी पहुचे। वहां पर नदी में उतरकर जल सत्याग्रह किया। किसान नेता दशरथ कुमार ने कहा कि किसानों की ये लड़ाई किसी व्यक्ति या राजनेतिक दल के खिलाफ नहीं बल्कि गलत नीतियों के खिलाफ है। जिससे किसान को नुकसान उठाना पड़ रहा है। शुगर मिल इस क्षेत्र के किसानों का भविष्य है जिसके लिए क्षेत्र का किसान अंतिम सांस तक लड़ेगा। किसान नेता गिर्राज गौतम ने कहा कि बिजली के निजी करण को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। युवा क्षेत्र के किसानों को कमजोर समझने वाले अपने कान और आंख खोल ले। अब किसान ओर युवा अपनी लड़ाई के लिए संकल्प ले चुका है। आने वाले समय पर किसान ओर युवा अपनी ताकत दिखाएंगे। गौतम ने बिजली विभाग को चेताते हुए कहा कि 7 दिनों में माधोराजपुरा ग्रिड को हेम मॉडल से बाहर कर पुरानी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए वरना डिस्कॉम ऑफिस पर ताला लगा कर धरना दिया जाएगा। किसी कर्मचारी को बैठने नहीं दिया जाएगा। गांवों में कर्मचारियों को घुसने नहीं दिया जाएगा। अगर कोई बड़ी घटना घटित होती है तो जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। 1 महीने में शुगर मिल को लेकर अगर सरकार ने किसानों से वार्ता कर सकारात्मक पहल नहीं की तो बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा। जल सत्याग्रह को पूर्व सरपंच राम गोपाल मीणा, किसान नेता हरी शंकर नागर, पुष्पचंद गुर्जर, राधेश्याम मीणा, रामस्वरूप पहाड़, राजेंद्र मीणा भेरू लाल मीणा, गौरी शंकर मीणा, मोहन लाल नागर, जगदीश शर्मा, बद्री लाल बैरागी, विजेंदर सिंह, दिनेश नागर, नवीन गुर्जर, नरेंद्र धाबाई, चंद्र प्रकाश गुर्जर, चंद्र कैलाश नागर मौजूद रहे।


