जबलपुर के संयुक्त कलेक्टर पुष्पेंद्र आहके ने तहसील मंझौली में पदस्थ सहायक ग्रेड 3 अजय चौबे और तहसील कार्यालय आधारताल के निलंबित पटवारी जागेंद्र पीपरे को पत्र जारी कर निर्देशित किया है कि दोनों की लगातार अनुपस्थिति के कारण उनकी विभागीय जांच लंबित है। इस संबंध में 8 जनवरी को विभागीय अधिकारी के सामने पेश होकर अपना पक्ष रखने की मोहलत दी है। अनुपस्थिति पर एक पक्षीय कार्यवाही की जाएगी। दरअसल, जमीन फर्जीवाड़े के मामले में पटवारी जागेंद्र पीपरे और लिपिक अजय चौबे फिलहाल फरार हैं। मॉडल टॉउन निवासी शिवचरण पांडे के पिता महावीर पांडे के नाम पर रैगवां में एक हेक्टेयर जमीन थी। महावीर की मौत के बाद शिवचरण का नाम दस्तावेजों में दर्ज हुआ। लेकिन, आठ अगस्त 2023 को एकाएक शिवचरण का नाम खसरे समेत अन्य दस्तावेजों से हटा दिया गया। जिस पर शिवचरण ने मामले की शिकायत प्रशासनिक अधिकारियों से की थी जिसके बाद जांच शुरू की गई। मामले की जांच की गई, तो पता चला कि ये जमीन तहसील कार्यालय में पदस्थ कम्प्यूटर ऑपरेटर दीपा दुबे ने तहसीलदार धुर्वे और पटवारी जागेंद्र पीपरे के साथ मिलीभगत करके षड्यंत्र पूर्वक महावीर के नाम की फर्जी वसीयत बनाई गई जिसमें उन्होंने पूरी जमीन का नामांतरण अपने पिता श्याम नारायण चौबे के नाम पर करा लिया। उस वक्त श्याम नारायण कलेक्ट्रेट कार्यालय में ड्राइवर के पद पर पदस्थ थे। उनकी मौत के बाद दीपा ने जमीन का नामांतरण अपने भाई के नाम पर करवा लिया और जमीन को बेच दिया पुलिस ने इस मामले में 7 लोगों के खिलाफ प्रकरण पंजीबद्ध किया है।


