भिंड में परिवहन विभाग की लापरवाही का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। हर साल जिले में 600 से अधिक सड़क हादसे हुए। बावजूद इसके परिवहन विभाग का अमला केवल रस्मअदायगी के तौर पर वाहन चेकिंग के लिए सड़कों पर उतरता है और जल्द ही गायब हो जाता है। सोमवार को भी ऐसा ही देखने को मिला, जब जिला परिवहन अधिकारी अर्चना परिहार ने रौन कस्बे में कुछ स्कूल बसों की चेकिंग की और तत्काल मुरैना के लिए रवाना हो गईं। दरअसल, जिला परिवहन अधिकारी अर्चना परिहार को पिछले महीने मुरैना के साथ भिंड का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। इस वजह से चेकिंग अभियान नियमित नहीं हो पा रहा है। दो महीने में यह दूसरी बार था जब अधिकारी सड़कों पर नजर आईं। इससे पहले उन्होंने मालनपुर में फैक्ट्री बसों की चेकिंग की थी। सोमवार को उन्होंने रौन बाइपास पर 4-5 बसों की जांच की, लेकिन कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की। जांच के दौरान सड़कों पर कई बस बिना परमिट दौड़ती पाई गईं। इनमें इमरजेंसी गेट लॉक, रेमेडियल टायरों का अभाव और ओवरलोडिंग जैसी खामियां थीं। ड्राइवर और क्लीनर ड्रेस में नहीं थे। भनक लगते ही कई वाहन मालिकों ने अपनी बसें सड़क किनारे खड़ी कर दीं। 53 वाहनों की जांच, 6 बस जब्त
परिवहन अधिकारी परिहार के मुताबिक पुलिस और आरटीओ ने संयुक्त तौर पर लहार और रौन क्षेत्रों में चेकिंग अभियान चलाया। 53 वाहनों की जांच हुई, जिनमें एस.जी.एस. स्कूल की 6 बसें बिना परमिट और फिटनेस के पाई गईं। इन बसों को जब्त कर थाना रौन में खड़ा कराया। साथ ही 17 अन्य वाहनों पर चालान काटकर ₹43,000 का जुर्माना वसूला गया। अभियान में शामिल थाना प्रभारी आशुतोष सिंह, परिवहन अधिकारी अर्चना परिहार और अन्य स्टाफ ने वाहन मालिकों को मोटर यान अधिनियम और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का पालन करने के निर्देश दिए। भास्कर ने जिले की प्रभारी परिवहन अधिकारी परिहार से बातचीत करने की कोशिश की लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुआ।


