मानवाधिकार के लिए संघर्षरत वरिष्ठ अधिवक्ता रवि किरण जैन का:हाईकोर्ट के सीनियर वकील, पीपुल्स यूनियन फार सिविल लिबर्टीज के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे रवि

पीपुल्स यूनियन फार सिविल लिबर्टीज के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता रवि किरण जैन का 29 जनवरी को आकस्मिक निधन हो गया। उनके निजी सहायक ओमपाल ने शंकर घाट प्रयागराज के इलेक्ट्रिक शवदाह गृह में अंतिम संस्कार किया। गरीबों मजलूमों के हक के लिए व भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता जैन के निधन से अधिवक्ताओं में गहरा शोक छा गया। उनकी अंतिम यात्रा में वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता, पूर्व न्यायमूर्ति रणविजय सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल चतुर्वेदी, वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश त्रिवेदी, के के राय, वरिष्ठ अधिवक्ता वजाहत हुसैन खान, वरिष्ठ अधिवक्ता इमरानुल्लाह , वरिष्ठ अधिवक्ता फरमान अहमद नकवी, विनोद चंद्र दूबे, पूर्व छात्र नेता ऋचा सिंह, नेहा यादव आदि भारी संख्या मे लोग शामिल हुए। प्रयागराज अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष एन के चटर्जी, आदर्श अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष सभाजीत सिंह, सचिव पीयूष त्रिपाठी,वरिष्ठ उपाध्यक्ष पूजा मिश्रा, जूनियर लायर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एम के तिवारी व सचिव जी पी सिंह,यंग लायर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संतोष त्रिपाठी, सचिव जे बी सिंह, उपाध्यक्ष भानु देव पांडेय, आर पी तिवारी, सहित विभिन्न संगठनों ने शोक श्रद्धांजलि अर्पित की। स्व जैन के निकटतम शिष्य अधिवक्ता के के राय ने बताया कि सहारनपुर के व्यवसाई परिवार में जन्मे वरिष्ठ अधिवक्ता जैन ने छात्र जीवन में समाजवादी आंदोलन से जुड़े और छात्र संघ के अध्यक्ष बने। 1972 मे सहारनपुर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकालत शुरू की। पी यू सी एल संस्था के अध्यक्ष बने और मानवाधिकारों व मजलूमों के हक़ के लिए पी आई एल के माध्यम से न्याय दिलाने में लगे रहे। उत्तराखंड आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर रामपुर तिराहा बर्बर कांड की जांच सीबीआई को सौंपने व मुआवजा दिलाने के लिए जनहित याचिका दायर कर न्याय दिलाने में मदद की। प्रदेश में मानवाधिकार आयोग का याचिका के माध्यम से गठन कराया । पुलिस हिरासत में मौत, फर्जी मुठभेड़,14 साल से अधिक समय से बंद कैदियों की रिहाई, भ्रष्टाचार व जजों में भाई भतीजावाद के खिलाफ संघर्ष किया। 22 जजो का किथ एण्ड किन के आधार पर तबादला हुआ। स्व जैन ने प्रदेश की आबादी के हिसाब से हाईकोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने का संघर्ष किया। शुआटस के खिलाफ 11 फर्जी पी आई एल कर एक लाख रुपए हर्जाने की वसूली की याचिका दायर की तो जनहित याचिकाओं के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।

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