राजस्थान फिल्म फेस्टिवल के तहत शनिवार को होटल बैलाकासा में रीजनल सिनेमा टॉक आयोजित हुई। इसमें देशभर से आए फिल्मकारों और कलाकारों ने रीजनल फिल्मों की खूबसूरती पर बात की। इस कार्यक्रम में बॉलीवुड एक्टर चंकी पांडे, सुमित व्यास और म्यूजिक डायरेक्टर दिलीप सैन भी मौजूद रहे। फिल्मकारों ने भारतीय सिनेमा के निर्माण में क्षेत्रीय सिनेमा की भूमिका, उभरते फिल्ममेकर्स के लिए फिल्म फेस्टिवल्स के महत्व, स्टोरीटेलिंग ट्रेंड्स : पारंपरिक बनाम ओटीटी फॉर्मेट और क्षेत्रीय फिल्म निर्माताओं के सामने चुनौतियाें पर अपनी बात रखी। चंकी पांडे ने कहा कि कहानियों पर फिल्मों का भविष्य टिका होता है, बेहतरीन कहानी को हर जगह पसंद किया जाएगा। रीजनल फिल्मों ने अपनी उपस्थिति से हमेशा चर्चा बटोरी। हर जगह स्टोरी किंग होती है और वही सफलता दिलवाती है। सुमित व्यास ने कहा कि सैराठ एक खास भाषा में बनी फिल्म थी और उसने अपनी कहानी के दम पर सक्सेस प्राप्त की। वह उस किरदार की जीत थी, जिसमें कोई नॉन फेस नहीं था। यदि उसमें कोई स्टेब्लिश एक्टर होता तो शायद वह उतना अच्छा परफॉर्म नहीं कर पाती या उसका इतना बड़ा इम्पेक्ट नहीं निकलता। आज देशभर का रीजनल कंटेंट हर किसी को पसंद आ रहा है। हर जगह अपनी कल्चर के कारण अलग पहचान रखती है। मेरे राजस्थान की भी अलग खूबसूरती है। मेरी भी कोशिश रहेगी कि यहां के कंटेंट और सिनेमा के लिए काम कर सकूं। फेस्टिवल की फाउंडर संजना शर्मा ने कहा कि अब रीजनल फिल्मों का यह दौर स्वर्णिम है। ओटीटी के आने के बाद राजस्थानी फिल्मों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। फिल्मों को मंच मिलने लगा है। स्थानीय कहानियों को सही जगह मिल रही है। फेस्टिवल के प्रोग्रामिंग हैड अनिल जैन ने बताया कि आने वाले टाइम में रीजनल सिनेमा काफी बढ़ेगा, ओटीटी के आने से एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में काफी तेजी से बदलाव हो रहे हैं। 2019-2020 में डिजिटल मार्केट 16 हजार करोड़ का था, जो 2024-2025 तक साढ़े 37 हजार करोड़ का हो चुका है। आज का युवा सबसे ज्यादा एंटरटेनेंट कंटेंट देख रहा है, जिसमें 52 प्रतिशत क्षेत्रीय भाषा को पसंद कर रहे हैं। 97 प्रतिशत मोबाइल पर और 13 प्रतिशत लोग टीवी देख रहे हैं। ओटीटी के आने से टीवी के दर्शकों की संख्या घट गई है। स्टेज के को-फाउंडर प्रवीण सिंघल ने कहा कि ओटीटी की वजह से स्थानीय कहानियां घर-घर तक पहुंच रही है। हम राजस्थानी कंटेंट को हरियाणा और भोजपुरी में भी पहुंचा रहे हैं और उसका बेहतरीन रेस्पॉन्स मिल रहा है। अब अपने मुद्दों को कहानियों में बदलने की जरूरत है, जिससे लोग और अच्छे से कनेक्ट हो सके। गुजराती सिनेमा को रिप्रजेंट कर रहे डॉ. जयेश परवा ने कहा कि हमारी रीजनल इंडस्ट्री डवलप हो रही है। बजट के मामले में संघर्ष करना पड़ रहा है। लेकिन हम धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए अपनी पहचान बनाने में लगे हुए हैं। राजस्थानी फिल्मों के एक्टर श्रवण सागर ने राजस्थान फिल्म फेस्टिवल के जरिए फिल्म मार्केट डवलप करने की बात कही। रीजनल फिल्में अपनी पहचान को आगे बढ़ा रही है, राजस्थान भी लगातार इस दिशा में काम कर रही है। म्यूजिक डायरेक्टर दिलीप सेन ने कहा कि बॉलीवुड हो या रीजनल हो म्यूजिक हर किसी के लिए बेहतर ही होना चाहिए। संगीत के बिना हर फिल्म अधूरी है। रीजनल फिल्मों में अब अलग तरह का और हटकर म्यूजिक आ रहा है। इस चर्चा में डायरेक्टर व राइटर साई कबीर, एस.डी. मणिपौल (डायरेक्टर, साला), नटराज धीरन (एक्टर, साला), रविंद्रनाथ गुरु (सिनेमैटोग्राफर, साला), नितिन कांबले (डायरेक्टर, जिलाबी), रमेश बारिक (प्रोड्यूसर, अजीरा रेबाटी), स्वप्निल मेहता (डायरेक्टर, विक्टर 303), वाली मोहन दास (डायरेक्टर, मद्रास्कारन), प्रसन्ना कुमार एस (सिनेमैटोग्राफर, मद्रास्कारन), एस.ए.एम. सी.एस. (म्यूजिक डायरेक्टर, मद्रास्कारन) स्टेज ओटीटी प्रतिनिधि रेणू भी मौजूद रही।


