चित्तौड़गढ़ जिले में चल रही फोर्थ क्लास भर्ती परीक्षा के दूसरे दिन शनिवार को 8842 परीक्षार्थी परीक्षा देने पहुंचे। यहां कुल 10032 अभ्यर्थी रजिस्टर्ड थे। उपस्थिति 88.14 प्रतिशत रही। अभ्यर्थियों ने कहा-पेपर एवरेज था। किसी को मैथ कठिन लगी तो किसी को इंग्लिश और GK ने परेशान किया। ज्यादातर परीक्षार्थियों का कहना था कि प्रतियोगी बहुत ज्यादा हैं, क्योंकि बेरोजगारी के चलते हर कोई हर परीक्षा में किस्मत आजमा रहा है। एग्जाम देकर निकले अभ्यर्थियों की मुसीबत बारिश ने भी बढ़ा दी। परीक्षा खत्म होने के बाद अचानक तेज बारिश हुई। कैंडिडेट सेंटरों से भीगते हुए निकले। बाह इंतजार कर रहे परिजन भी भीगे। कुछ उम्मीदवार तो बारिश से बचने के लिए शाम 6:30 बजे तक सेंटर में ही रहे। चूंकि परीक्षा में मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति नहीं थी, ऐसे में अभ्यर्थियों को अपने परिजनों को सूचना देने में परेशानी हुई। दो पारियों में हुआ एग्जाम, 18 केंद्रों में आयोजन यह परीक्षा जिले के 18 केंद्रों पर आयोजित की गई। परीक्षा सुबह और दोपहर दो पारियों में ली गई। पहली पारी में 5016 में से 4406 परीक्षार्थी पहुंचे, जबकि 610 अनुपस्थित रहे। इस तरह पहली पारी में 87.84 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज हुई। वहीं दूसरी पारी में 5016 उम्मीदवारों में से 4436 ने परीक्षा दी और 580 अनुपस्थित रहे। दूसरी पारी की उपस्थिति 88.44 प्रतिशत रही। दोनों पारियों को मिलाकर कुल उपस्थिति का औसत 88.14 प्रतिशत रहा। बारिश ने भिगोया.. अभ्यर्थियों ने बताया कैसा रहा पेपर अभ्यर्थियों ने कहा कि पेपर औसत स्तर का था। कुछ ने मैथ्स को सबसे कठिन माना, तो कुछ के लिए इंग्लिश और GK मुश्किल रही। हिंदी और ज्योग्राफी को अधिकांश ने आसान बताया। निंबाहेड़ा निवासी 24 साल की विद्या जटिया ने कहा- मैं एमए पास हूं, पेपर औसत लगा। मैथ्स कठिन रही, लेकिन ज्योग्राफी, हिंदी और जीके आसान थीं। पेपर में चित्तौड़गढ़ से संबंधित 1 प्रश्न पूछा गया- विजयस्तम्भ कहां स्थित है। कपासन निवासी 26 वर्षीय लीला गुर्जर ने कहा- मैं बीए और बीएड कर चुकी हूं, हिंदी और जीके तो आसान थे लेकिन मैथ्स और इंग्लिश ने परेशान किया। सतपुड़ा की रहने वाली 23 वर्षीय सरिता मेनारिया ने कहा- मैंने बीए किया है। इससे पहले कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा भी दी है। मेरा मानना है कि बेरोजगारी इतनी ज्यादा है कि जो भी भर्ती निकल रही है, उसमें हाथ आजमाना जरूरी है। पेपर न ज्यादा कठिन था, न आसान। कपासन की ही 30 साल की सलमा नीलगर ने बताया-मैंने बीए और बीएड किया है। इससे पहले पटवारी भर्ती परीक्षा भी दी है। इस बार जीके, इंग्लिश और हिंदी तो आसान रहे लेकिन मैथ्स हल करने में काफी समय लगा। इस परीक्षा में शामिल हुए अधिकतर अभ्यर्थी उच्च शिक्षित थे। बीए, बीएड और एमए पास तक के छात्र-छात्राएं इस परीक्षा में बैठे। उम्मीदवारों का कहना है कि नौकरियों की कमी इतनी ज्यादा है कि लोग अपने योग्यता स्तर से नीचे की भर्तियों में भी आवेदन कर रहे हैं। जो भी अवसर मिलता है, युवा उसे आजमाने से पीछे नहीं हट रहे। सुबह से लगी लंबी कतारें परीक्षा केंद्रों पर सुबह से ही अभ्यर्थियों की भीड़ लग गई थी। अधिकांश परीक्षार्थी समय से काफी पहले पहुंच गए ताकि उन्हें प्रवेश में किसी प्रकार की दिक्कत न हो। हर सेंटर पर छात्रों की लंबी कतारें देखी गईं। उनके साथ परिजन और परिचित भी बड़ी संख्या में पहुंचे, जो बाहर खड़े रहकर परीक्षा समाप्त होने का इंतजार करते रहे।


