आत्मनिर्भर खेती की राह, नई तकनीक और फसलों से बढ़ेगा मुनाफा

भास्कर न्यूज़ | लुधियाना पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (पीएयू) के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, बलौवाल सांखरी में किसान मेला उत्साह और जोश के साथ आयोजित हुआ। इस मेले ने न केवल किसानों को नई तकनीकों और किस्मों से जोड़ा बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और मुनाफाखोर खेती की ओर बढ़ने का संदेश भी दिया। “जिन्सां तो उत्पाद बनाइए, खेती मुनाफा होर वधाइए” थीम पर आयोजित इस मेले में बड़ी संख्या में किसान, महिला किसान, छात्र और कृषि उद्यमी शामिल हुए। किसानों ने विशेषज्ञों से सीधे बातचीत कर अपनी समस्याओं का समाधान खोजा। पीएयू द्वारा अनुशंसित बीज, पौध सामग्री और फसल साहित्य वाले स्टॉलों पर खासा उत्साह दिखा, वहीं खरीफ और रबी फसलों की किताबें भी खूब बिकीं। पानी बचत और ऑर्गेनिक खेती पर जोर– मेले के दौरान पीएयू के वाइस चांसलर डॉ. सतबीर सिंह गोसल ने किसानों से जल संरक्षण तकनीकें अपनाने, रसायनों के प्रयोग को घटाने और क्लाइमेट-रेजिलिएंट किस्में लगाने का आह्वान किया। उन्होंने किसानों को एग्रो-प्रोसेसिंग यूनिट्स और ट्रेनिंग सेंटर्स का पूरा लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। डॉ. गोसल ने कहा कि खेती को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर उत्पाद निर्माण और डायरेक्ट मार्केटिंग की ओर ले जाना होगा। उन्होंने ड्रैगन फ्रूट, आंवला और औषधीय पौधों की खेती, सौर ऊर्जा और ड्राइवरलेस ट्रैक्टर जैसी आधुनिक तकनीकों को भी खेती में शामिल करने पर जोर दिया। साथ ही, बाढ़ प्रभावित किसानों को भरोसा दिलाया कि विश्वविद्यालय हर मुश्किल घड़ी में उनके साथ खड़ा है। वाइस चांसलर बोले-खेती को उत्पादन से आगे बढ़ाएं: पीएयू के रिसर्च डायरेक्टर डॉ. अजर सिंह धत्त ने किसानों को बताया कि यूनिवर्सिटी अब तक 950 से अधिक किस्में विकसित कर चुका है। उन्होंने आगामी सीजन के लिए गेहूं पीबीडब्ल्यू 872, जौ पीएल 942 और ग्रीष्मकालीन मूंग एसएमएल 2575 जैसी नई किस्में सुझाईं। साथ ही उन्होंने पीबीडब्ल्यू चपाती 1 गेहूं में कम यूरिया इस्तेमाल करने, मक्का की पराली को सुपर सीडर से मिलाने और चना में कीट प्रबंधन के जैविक तरीकों पर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि खेती को विविध बनाकर और बकरियां पालकर किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। मेले में प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया। छात्रों ने नशा मुक्ति और कृषि से जुड़ी कविताओं से सबका दिल जीता। डॉ. अशोक कुमार ने किसानों से पराली जलाने की प्रथा पूरी तरह छोड़ने और जैविक खेती अपनाने की अपील की। वहीं, डॉ. मखन सिंह भुल्लर ने कहा कि छोटे स्तर पर उद्यमिता और किचन गार्डन भी आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम कदम हैं। कार्यक्रम में मंच संचालन डॉ. जसलीन कौर और डॉ. कुलदीप सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मनमोहंजीत सिंह, डीन कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर और डायरेक्टर, क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, बलौवाल सांखरी ने किया। अंत में मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया। किसान मेला उम्मीद और आत्मविश्वास का संदेश देकर समाप्त हुआ, जिसने किसानों को आत्मनिर्भर और नवाचार अपनाने की नई राह दिखाई।

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