शहर में कई शादीशुदा महिलाएं इन दिनों पति के धोखे और आर्थिक समस्याओं के कारण गंभीर मानसिक और भावनात्मक तनाव झेल रही हैं। कुछ महिलाएं पति के अफेयर या उनकी लापरवाही से टूट रही हैं, तो कई आर्थिक अनियमितताओं और पैसों की गड़बड़ी के कारण परेशान हैं। इस स्थिति में महिलाएं एक्सपर्ट के पास पहुंच रही हैं, ताकि पति और परिवार की काउंसलिंग करवाई जा सके और बच्चों के भविष्य के लिए सही और सुरक्षित निर्णय लिए जा सकें। एक्सपर्ट का मानना है कि खुला संवाद, पारदर्शिता और भावनात्मक सहयोग ही ऐसे मामलों में महिलाओं के लिए राहत और समाधान का रास्ता खोल सकते हैं। संवाद और सहयोग से समाधान संभव दंपती में खुला संवाद व वित्तीय पारदर्शिता बेहद जरूरी केस 1 : पति के कारण परिवार की बचत सुरक्षित नहीं हो पा रही : एक महिला का पति लगातार धोखा दे रहा है। बेटे और बेटी होने के बावजूद उन्हें चुप रहना पड़ता है। पति ने गोल्ड बेच दिया और बुटीक के खर्चे का ध्यान नहीं रखा। महिला ने कई बार कोशिश की लेकिन पति के कारण परिवार की बचत सुरक्षित नहीं हो पा रही थी। महिला ने एक्सपर्ट की सलाह लेकर पति की काउंसलिंग करवाई, ताकि वह अपने व्यवहार में सुधार ला सके। एक्सपर्ट का कहना है कि ऐसे मामलों में खुले संवाद और वित्तीय पारदर्शिता बेहद जरूरी है। केस 2 : ब्लैकमेल की समस्या : प|ी के गर्भवती होने के दौरान पति अपनी कलीग के साथ अफेयर में शामिल हो गया। बाद में कलीग ने ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। पति ने गलती स्वीकार की और प|ी को विश्वास में लेकर स्थिति को संभाला, लेकिन महिला मानसिक रूप से अब भी परेशान थी। महिला ने एक्सपर्ट की सलाह ली। एक्सपर्ट का कहना है कि ऐसे मामलों में पति-प|ी के बीच ईमानदारी और भावनात्मक सहयोग जरूरी है। केस 3 : पति की आर्थिक लापरवाही और गुस्सा: एक महिला का पति उसकी कमाई का पूरा पैसा खर्च कर देता है। प|ी की बात सुनने को तैयार नहीं। जब स्थिति असहनीय हो गई, तो महिला ने एक्सपर्ट की मदद ली। एक्सपर्ट ने सलाह दी कि वित्तीय नियंत्रण साझा करना जरूरी है। बच्चों की भलाई के लिए महिला को निर्णय लेने में सक्रिय होना चाहिए। वर्षा बिसारिया, लाइफ कोच कहती हैं कि ऐसे मामले अब आम होते जा रहे हैं। पति-प|ी के बीच खुला संवाद, पारदर्शिता और बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए वित्तीय व भावनात्मक काउंसलिंग बेहद जरूरी है। महिलाएं अपनी भावनाओं और आर्थिक निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभाएं और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी या मानसिक स्वास्थ्य सलाह लेने से बिल्कुल भी हिचकिचाएं नहीं।


