आरटीए हर महीने लाखों रुपए के चालान काटकर पंजाब सरकार के राजस्व में इजाफा करता है। वहीं सितंबर महीने में विभाग का रिकॉर्ड पूरी तरह ठप नजर आया। 20 तारीख तक एक भी चालान नहीं काटा गया। जुलाई में आरटीए विभाग ने करीब 38 लाख रुपये के चालान काटे थे, जबकि अगस्त में यह आंकड़ा 35 लाख रुपये रहा। लेकिन इस महीने के 20 दिन बीत जाने के बाद भी चालान का आंकड़ा ‘शून्य’ पर खड़ा है। इस मामले में जब एआरटीए रुपिंदर सिंह से बात की गई तो उन्होंने सफाई दी कि विभाग के सभी अधिकारी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में ड्यूटी पर तैनात थे, जिस कारण चालान नहीं काटे जा सके। हैरानी की बात यह है कि अब भी अधिकांश आरटीए अधिकारी अपनी सीटों से नदारद हैं। विभागीय सुस्ती का सीधा फायदा अवैध बस चालकों को मिल रहा है, जो बिना किसी रोक-टोक के सड़कों पर दौड़ रहे हैं।


