3 हजार करोड़ रुपए की ठगी का आरोपी लविश चौधरी अब तक पुलिस गिरफ्त से दूर है। वह मध्यप्रदेश समेत 7 राज्यों में निवेश के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का सरगना है। कई एजेंसियों को चमका देने के बाद पता चला है कि लविश दुबई में छिपा बैठा है। लविश के हजारों एजेंट्स ठगी की रकम को लगातार उस तक पहुंचा रहे हैं। 18 सितंबर को लविश का नया वीडियो सामने आया है। वीडियो में वह वर्चुअली अपने एजेंट्स को भरोसा दिलाते दिख रहा है कि उसके खिलाफ फरार होने और एफआईआर की केवल अफवाह है। कंपनी बीते पौने 6 साल से टिकी है और इंशाअल्लाह आगे भी टिकी रहेगी। मेरे बारे में अफवाह उड़ाने वाले जान लें, मैं अपना काम करता रहूंगा। बता दें, 20 जून 2025 को एसटीएफ ने लविश के 2 गुर्गों मदन मोहन कुमार और दीपक शर्मा को दिल्ली से गिरफ्तार किया था। इन दोनों ने ही एसटीएफ को जानकारी दी थी कि गिरोह का सरगना लविश चौधरी दुबई और साउथ अफ्रीका में रहता है। दोनों देशों में बैठकर वह गिरोह के सदस्यों से कनेक्ट रहता है। यहीं से उन्हें वर्चुअल संबोधित करता है। लविश चौधरी ने दुबई में अपना नाम नवाब खान और साउथ अफ्रीका में राशिद अली रखा हुआ है। आलीशान होटलों और फार्म हाउस में होती थीं मीटिंग्स
भारत में लविश के एजेंटों की शामली, बागपत, मुजफ्फर नगर, गाजियाबाद के आलीशान होटलों, फार्म हाउस पर एजेंटों की मीटिंग की जाती थी। बैठक में शामिल होने वाले लोगों को भोजन से लेकर बेहतरीन गिफ्ट तक दिए जाते थे। लुकआउट नोटिस जारी कराने की तैयारी में एसटीएफ
एसटीएफ ने मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया है। डीएसपी जगदीश सिद्धू के नेतृत्व में अलग-अलग टीमें पड़ताल कर रही हैं। इसका सुपरविजन विशेष पुलिस महानिदेशक एसटीएफ पंकज कुमार श्रीवास्तव कर रहे हैं। लविश की गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ लुकआउट नोटिस जारी कराने की तैयारी में है। लविश पौने 6 साल से लगातार ठगी का नेटवर्क संचालित कर रहा था। अलग-अलग राज्यों में ठगी के लिए अलग-अलग नाम से कंपनी बनाई जाती थीं। शक न हो, इसके लिए कंपनी के संचालक मंडल के नामों में फेरबदल कर दिया जाता था। टेलीग्राम पर तलाशते हैं शिकार
एसटीएफ की गिरफ्त में आए जालसाज, टेलीग्राम एप पर एक दर्जन से अधिक ग्रुप बनाकर अलग-अलग कंपनियों में पैसा निवेश करने का झांसा दे रहे थे। टेलीग्राम पर कंपनी का एक लिंक दिया जाता था, जिसमें कंपनी की पॉलिसी, इन्वेस्टमेंट और रिटर्न्स की जानकारी दी जाती थी। रजिस्ट्रेशन के नाम पर आरोपी 10 से 18 हजार रुपए लेते थे। निवेश कराने के बाद कुछ दिन तक रिटर्न देकर भरोसा जीता जाता था। इसके बाद लिंक को इनएक्टिव कर दिया जाता था। टारगेट कस्टमर्स को अलग लिंक देकर लाखों रुपए का निवेश कराया जाता था। जालसाज ऑनलाइन ठगी की रकम को विदेशों में ट्रांसफर कर दिया करते थे। अब तक की जांच में पुलिस को आरोपियों के बैंक खातों से करीब तीन हजार करोड़ रुपए के लेन-देन का हिसाब मिल चुका है। इसी के साथ 90 करोड़ रुपए एसटीएफ ने सीज कराए हैं, जिन्हें विदेशी खातों में ट्रांसफर करने की तैयारी थी। ईडी भी कर रही ठगी के इस मामले की जांच
लविश की कंपनियों में निवेश के नाम पर मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और असम के हजारों लोगों से ऑनलाइन ठगी की गई है। ठगी की रकम राइडेंट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड, किन्डेंट बिजनेस सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी सहित 16 अलग-अलग करंट अकाउंट्स में मंगाई जाती थी। रकम BOTBRO नाम से खुले बैंक खातों में डलवाई जाती थी। फिर मेटा-5 अकाउंट में इसे यूएस डॉलर में दिखाया जाता था। बाद में इस करेंसी को कन्वर्ट कर फॉरेक्स मार्केट में ट्रेडिंग की जाती थी। इस बारे में प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी फेमा एक्ट के तहत जांच कर रहा है। फरवरी में लविश के शामली स्थित मकान पर ईडी ने छापेमारी की थी। यहां से 90 लाख रुपए कैश समेत 170 करोड़ की चल संपत्ति जब्त की गई थी। ये खबर भी पढ़ें… 2283 करोड़ ठगने वाले लविश चौधरी की जूम मीटिंग मध्यप्रदेश समेत 7 राज्यों में निवेश के नाम पर 2283 करोड़ ठगने वाले लविश चौधरी का एक वीडियो सामने आया है। वह जूम मीटिंग लेकर निवेशकों को भरोसा दिला रहा है कि उसके खिलाफ दर्ज मुकदमे फर्जी हैं। पूरी खबर पढ़ें…


