घूस नहीं तो 40 साल से काम अटका:मंत्री का सम्मान लौटाया, फिर भी मीसाबंदी की फाइल आगे नहीं बढ़ी, बोले-कलेक्टर ने झूठी जानकारी दी

मैंने प्रभारी मंत्री को ज्ञापन दिया अपनी समस्या बताई। इस वाकये को एक महीना बीत चुका है लेकिन प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं कि उल्टा कलेक्टर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मेरे खिलाफ गलत जानकारियां दी। मेरी मानहानि करने की कोशिश की। ये कहना है दमोह के मीसाबंदी संतोष भारती का, जिन्होंने स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रभारी मंत्री के हाथों सम्मान लेने से इनकार कर दिया था। दरअसल, मीसाबंदी संतोष भारती ने उस समय आरोप लगाया था कि उन्होंने 40 साल पहले एक अफसर को 5 हजार रुपए की घूस नहीं दी तो उसने आज तक उनके मकान की रजिस्ट्री नहीं की। उन्होंने ये भी कहा था कि वो सम्मान के भूखे नहीं है बल्कि उन्हें न्याय चाहिए। इस वाकये को एक महीना बीत चुका है। दैनिक भास्कर ने दमोह में संतोष भारती से मुलाकात की और उनसे पूछा कि क्या उन्हें न्याय मिला? भारती ने कहा- उन्हें और उनकी पत्नी को डिफाल्टर बताकर प्रशासन ने उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने की कोशिश की है। वहीं प्रशासन अब भारती के केस को रिओपन करने की तैयारी में है। पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट… 15 अगस्त को मंच पर क्या हुआ था?
संतोष भारती बताते हैं, ‘शासन का आदेश है कि 15 अगस्त और 26 जनवरी के कार्यक्रमों में लोकतंत्र सेनानियों को सम्मान पूर्वक बुलाकर सम्मानित किया जाए। मैं आमतौर पर ऐसे कार्यक्रमों से दूर रहता था, क्योंकि मेरा मानना है कि मैंने जो कुछ भी किया, वह एक जिम्मेदार नागरिक के नाते देश और समाज के लिए किया, किसी सम्मान या धनोपार्जन के लिए नहीं।’ वे आगे कहते हैं, ‘इस बार दो अधिकारी मेरे पास आए और कार्यक्रम में आने का आग्रह करने लगे। मैंने उनसे साफ कहा कि मैं सम्मान लेना उचित नहीं समझता, क्योंकि ऐसे कार्यक्रमों में अक्सर फर्जी मीसाबंदी (आपातकाल के दौरान राजनीतिक बंदियों के साथ जेल में डाले गए सामान्य अपराधी) भी सम्मान लेने पहुंच जाते हैं। ऐसे लोगों के साथ बैठकर सम्मान लेना मेरे सिद्धांतों के खिलाफ है। जबरिया सम्मान देने की कोशिश
15 अगस्त के दिन जब वे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि आगे की पंक्तियों में वही लोग बैठे थे, जिन्हें वे ‘फर्जी मीसाबंदी’ मानते हैं। यह देखकर वे पीछे जाकर बैठ गए। जब प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार का भाषण समाप्त हुआ और सम्मान समारोह शुरू हुआ, तो अधिकारियों ने मंत्री को बताया कि ये मीसाबंदी संतोष भारती हैं। भारती उस क्षण को याद करते हुए कहते हैं, “मैंने मंत्री से अपनी शिकायत बताई और सम्मान लेने से मना कर दिया। लेकिन अधिकारी मुझ पर जोर देने लगे। कलेक्टर ने तो मुझे पकड़कर कहा, ‘नहीं-नहीं, आप तो सम्मान लीजिए।’ तब मेरा सब्र टूट गया। मैंने कहा- आप लोग अजीब बदतमीज हो गए हैं। कलेक्टर, एसपी, मंत्री बनकर खुद को भगवान समझने लगे हैं क्या? मैंने एक शॉल और श्रीफल के लिए अपना आत्मसम्मान गिरवी नहीं रख दिया है। मैंने उन्हें अपना ज्ञापन दिया और बिना सम्मान लिए वापस आ गया। अब जानिए किस वजह से भारती ने सम्मान नहीं लिया
दरअसल, संतोष भारती ने ये सम्मान इसलिए नहीं लिया, क्योंकि 40 साल पहले एक अधिकारी ने उनसे मकान की रजिस्ट्री के एवज में 5 हजार रुपए की कथित रिश्वत मांगी थी। सिलसिलेवार समझिए क्या हुआ था.. कलेक्टर पर मानहानि का केस करने की तैयारी
15 अगस्त की घटना के बाद यह मामला और बिगड़ गया। संतोष भारती का आरोप है कि दमोह कलेक्टर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर उनकी पत्नी को ‘डिफाल्टर’ बताया और कहा कि उन पर लाखों का किराया बाकी है, इसलिए रजिस्ट्री नहीं हो रही। भारती इस दावे को सफेद झूठ बताते हैं। वे कहते हैं, “यह हमारी छवि धूमिल करने की साजिश है। कलेक्टर की यह कानूनी जिम्मेदारी थी कि प्रेस कॉन्फ्रेंस करने से पहले वे सच का पता लगाते, हमारा पक्ष जानते। हमने सारा पैसा जमा कर दिया है, जिसके सबूत हमारे पास हैं। मैं कलेक्टर के खिलाफ मानहानि का केस करूंगा। मैं उन्हें छोड़ूंगा नहीं।” प्रशासन और सरकार का क्या कहना है?
इस पूरे मामले को लेकर भास्कर ने प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार और जिला प्रशासन के अफसरों से बात की। प्रभारी मंत्री परमार ने इस मामले को बेहद ही हल्के में लिया। जब उनसे पूछा गया कि संतोष भारती के ज्ञापन पर क्या कार्रवाई हुई, तो उन्होंने कहा- संतोष भारती ने सामान्य बातें उठाई थीं। ज्ञापन में भी कोई ऐसे बिंदु नहीं थे, जिस पर कोई कार्रवाई हो। सामान्य बातें ही थीं। दूसरी तरफ एडीएम मीना मेश्राम ने कहा कि मामले में कानूनी पेंच फंसा हुआ है। उन्होंने कहा कि संतोष भारती जी की पत्नी आभा भारती के नाम से मकान की रजिस्ट्री होनी थी। हमने जब गृह निर्माण मंडल से जानकारी ली, तो पता चला कि इस पर कोर्ट का एक आदेश हुआ था, जिसे रिओपन कराने के लिए विभाग की तरफ से हाईकोर्ट में आवेदन लगा हुआ है। इससे जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…
मीसाबंदी बोले- अफसर को घूस नहीं दी तो रजिस्ट्री नहीं की दमोह में स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में असहज स्थिति बन गई। यहां एक मीसाबंदी ने उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के हाथों सम्मान कराने से इनकार कर दिया। मंत्री और कलेक्टर सुधीर कोचर भरे मैदान में मीसाबंदी संतोष भारती को मनाते रहे, लेकिन वे नहीं माने। पढ़ें पूरी खबर…

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