छतरपुर के बागेश्वर धाम में महालय अमावस्या पर एक आयोजन हुआ। पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने उन ज्ञात-अज्ञात दिवंगत आत्माओं का त्रिपिंडी श्राद्ध कराया, जिनका कोई नहीं है। इस श्राद्ध में उन वीर सैनिकों को भी याद किया गया, जिन्होंने देश की रक्षा में प्राण दिए और जिनके शव परिवार को नहीं मिले। बनारस से आए पंडितों ने विधि-विधान से श्राद्ध किया। साथ ही विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ भी किया गया। पं. शास्त्री ने बताया कि जिन आत्माओं का पिंडदान नहीं होता, वे भटकती रहती हैं। उनके कल्याण और भगवान श्रीहरि के चरणों तक पहुंचाने के लिए यह अनुष्ठान किया गया। यज्ञाचार्य पं. राजा पाण्डेय के अनुसार त्रिपिंडी श्राद्ध सात्विक, राजसिक और तामसिक आत्माओं के लिए किया जाता है। बागेश्वर धाम ने इस अनूठे कार्य से समाज को संदेश दिया है। यह दर्शाया कि अतृप्त आत्माओं के कल्याण के लिए कोई भी प्रतिनिधि बनकर श्राद्ध कर सकता है।


