यहां डैम बिल्कुल नहीं बनने देंगे। भटकने से अच्छा है कि हम मर जाएं। ये डैम बनाने आए, तो हम पुल से ही नदी में कूद जाएंगे। इतनी अच्छी जमीनें हैं हमारी… ये चली गई, तो हमारे बच्चे क्या करेंगे? यह कहना है घाटाखेड़ी गांव की महिला रोड़ी बाई का। पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना के तहत गुना जिले की चांचौड़ा विधानसभा में बनने वाले प्रस्तावित बांध का विरोध शुरू हो गया है। रोड़ी बाई जैसे कई ग्रामीण क्षेत्र में डैम बनाने का विरोध कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि राजस्थान की बंजर जमीन को पानी देने के लिए गुना जिले की सिंचित और उपजाऊ जमीन को बर्बाद किया जा रहा है। वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे। उनकी मांग है कि बड़े बांध की जगह छोटे-छोटे स्टॉप डैम बनाए जाएं। नागरिक जगह-जगह विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। दैनिक भास्कर ने इन गांवों में पहुंचकर ग्राउंड जीरो पर लोगों से बात कर उनके विरोध की वजह जानी। पढ़िए यह रिपाेर्ट… सबसे पहले जानें क्या है यह परियोजना
बता दें कि, मध्यप्रदेश से गुजरने वाली पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) को जोड़ने वाले प्रोजेक्ट की शुरुआत पिछले वर्ष दिसंबर महीने में हुई। जयपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में एमपी, राजस्थान और केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय के बीच त्रिस्तरीय एग्रीमेंट (एमओयू) हुआ। पीकेसी परियोजना से एमपी में चंबल से लेकर मालवा तक के 3150 गांवों की 6 लाख 13 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो सकेगी। एमपी के 11 जिलों- गुना, शिवपुरी, सीहोर, देवास, राजगढ़, उज्जैन, आगर-मालवा, इंदौर, शाजापुर, मंदसौर और मुरैना में पीने का पानी मिलेगा। पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना की अनुमानित लागत 72 हजार करोड़ रुपए है। परियोजना से बनने वाले बांधों और जलाशयों की कुल जल भराव क्षमता 1908.83 घन मीटर होगी। 172 मिलियन घन मीटर पानी, ग्रामीणों के लिए पीने और उद्योगों के लिए रिजर्व रहेगा। 21 बांध और बैराज बनाए जाएंगे
पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना में मध्यप्रदेश से शुरू होने वाली पार्वती, कूनो, कालीसिंध, चंबल, शिप्रा और सहायक नदियों के पानी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल किया जाएगा। कुल 21 बांध और बैराज बनाए जाएंगे। श्रीमंत माधवराव सिंधिया सिंचाई कॉम्प्लेक्स में 4 बांध (कटीला, सोनपुर, पावा और धनवाड़ी), 2 बैराज (श्यामपुर, नैनागढ़), कुम्भराज कॉम्पलेक्स में 2 बांध (कुम्भराज-1 और कुम्भराज-2), रणजीत सागर, लखुंदर बैराज और ऊपरी चंबल कछार में 7 बांध (सोनचिरी, रामवासा, बचेरा, पदुनिया, सेवरखेडी, चितावद, सीकरी सुल्तानपुरा) बनेंगे। इसके अलावा गांधी सागर बांध की अपस्ट्रीम में चंबल, शिप्रा और गंभीर नदियों पर छोटे-छोटे बांधों का निर्माण भी प्रस्तावित है। 5 साल में पूरा होगा काम
केंद्र सरकार के सहयोग से बनने वाली इस परियोजना का काम अगले 5 साल में पूरा कर लिया जाएगा। 75 हजार करोड़ के खर्च में से 90% केंद्र जबकि 10% एमपी और राजस्थान सरकार देंगी। इसमें बैलेंसिंग रिजर्ववायर का निर्माण प्रस्तावित है। इसके साथ ही परियोजना में मध्य प्रदेश, राजस्थान के बीच मौजूदा चंबल दाईं मुख्य नहर (CRMC) और मध्य प्रदेश क्षेत्र में CRMC सिस्टम के अंतिम छोर तक मॉडर्नाइजेशन और रीन्यूअल के लिए प्रावधान किया गया है। CM डॉ. मोहन यादव ने इस परियोजना की शुरुआत को लेकर यह कहा था- दोनों राज्यों के किसानों और नागरिकों के लिए योजना वरदान साबित होगी। इस परियोजना से किसानों को भरपूर सिंचाई के लिए पानी मिलेगा और विकास के नए द्वार खुलेंगे। अब जानें क्यों हो रहा परियोजना का विरोध गुना के घाटाखेड़ी में बनेगा बांध इस योजना के तहत पहले चांचौड़ा विधानसभा के दीतलवाड़ा में बांध प्रस्तावित किया गया था, लेकिन कुछ परेशानियों के कारण अब घाटाखेड़ी में बांध बनना प्रस्तावित किया गया है। इसकी प्राथमिक रिपोर्ट बनाकर दिल्ली भेजी गई है। वहीं से जगह फाइनल होगी। हालांकि, घाटाखेड़ी में बांध प्रस्तावित होने के बाद इस इलाके के नागरिकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। 10 सितंबर को कई गांवों के किसानों ने बीनागंज में रैली निकालकर प्रदर्शन किया। उन्होंने बड़े डैम की जगह छोटे डैम बनाने की मांग की। 100 फीट ऊंचा बांध बनाने की तैयारी
दरअसल, अभी तक जो जानकारी सामने आई है, उसके अनुसार 31 मीटर ऊंचा डैम बनाने की तैयारी है। इस डैम की लंबाई 5.5 किलोमीटर की होगी। जिस जगह यह प्रस्तावित किया गया है, वहां दोनों तरफ छोटी पहाड़ी हैं, जिनके बीच में ये बनेगा। इस डैम में 23 गेट होंगे। 8926 हैक्टेयर में इसका जल फैलाव क्षेत्र होगा। इसकी भराव क्षमता लगभग 400 MCM होगी। चार हजार परिवार होंगे प्रभावित
प्रस्ताव के अनुसार इस डैम के बनने से चार हजार परिवार सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। अगर एक परिवार में पांच सदस्यों का एवरेज भी माना जाए, तो सीधे तौर पर लगभग 20 हजार की जनसंख्या इस बांध से प्रभावित होगी। इनमें से अधिकतर परिवार खेती किसानी कर अपना जीवन यापन करते हैं। 9 हजार हैक्टेयर जमीन डूबेगी
जानकारी के अनुसार इस डैम में लगभग 16 गांव पूरी तरह डूब क्षेत्र में आयेंगे। इन गांवों की लगभग 9 हजार हैक्टेयर यानि 45000 बीघा जमीन डूब में चली जाएगी। इसमें से 6700 हैक्टेयर निजी भूमि और लगभग 2100 हैक्टेयर सरकारी भूमि डूब क्षेत्र में आएगी। जो जमीन डूब क्षेत्र में आ रहे है, उसमें से 70 प्रतिशत जमीन सिंचित है। वहीं इस डैम के बनने से 97 हजार हैक्टेयर जमीन में सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। गांव-गांव हो रहा विरोध
घाटाखेड़ी में डैम बनने की जानकारी सामने आते ही ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया है। दैनिक भास्कर की टीम जब घाटाखेड़ी गांव में पहुंची तो ग्रामीण एक जगह विरोध प्रदर्शन करते हुए मिले। इसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। वहीं कुछ युवक गांव गांव जाकर नागरिकों से विरोध के लिए अपील करते हुए दिखे। महिला बोली- दो बीघा जमीन, यही डूब गई तो क्या खाएंगे
विरोध प्रदर्शन कर रही एक महिला रोड़ी बाई अपनी बात करते हुए भावुक हो गईं। उनका कहना है कि हम तो डैम बिल्कुल नहीं बनने देंगे। हमारे बच्चे क्या करेंगे क्या खायेंगे, कहां रहेंगे। हम तो मर ही जाएंगे। उन्होंने बताया कि एक दो बीघा जमीन है, यही डूब जाएगी तो फिर हम क्या खायेंगे। हमारे पास तो कोई धंधा भी नहीं है कि उससे जीवन यापन कर लें। इतने छोटे छोटे बच्चों को लेकर कहां जाएंगे हम। क्या खिलाएंगे इन्हें। सरपंच बोले- यहां पीढ़ियों से रहते आ रहे, इसे कैसे छोड़ दें
वहीं पटोंदी गांव के सरपंच नेमी मीणा ने बताया कि ये हमारे पुरखों की जमीन है। पीढ़ियों से हम यहां रहते आ रहे हैं। जीवन को पटरी पर लाने के लिए संघर्ष किया है। इस जमीन को हम कैसे छोड़ दें। पंजाब और हरियाणा से ज्यादा हमने इस जमीन को उपजाऊ बनाया है। आप मिट्टी का परीक्षण करा कर देख सकते हैं, इस जमीन से अच्छी जमीन नहीं मिलेगी। इस उपजाऊ जमीन को ये बांध बनाकर डुबाना चाहते हैं। हम इस जमीन को बिल्कुल नहीं छोड़ेंगे। न यहां से कहीं जाएंगे, यहीं पर मर जाएंगे मिट जाएंगे, पर हम हमारी जमीन, खेत खलियान नहीं छोड़ेंगे। “पुरखों की जमीन डुबाकर हम डैम का क्या करेंगे”
गांव के बुजुर्ग किसान शिवराज सिंह ने कहा कि हमारे पुरखों की जमीन डुबाकर हम डैम का क्या करेंगे। हमारे पास तो वैसे ही पर्याप्त पानी है। पूरी सिंचित जमीन है। लोग बोले- दो छोटे डैम बनाएं
ग्रामीण राधेश्याम चंदेल ने बताया कि तमाम गांव के किसान यह मांग कर रहे हैं कि सरकार द्वारा पार्वती नदी पर जो एक विशाल बांध बनाने का निर्णय लिया गया है, इसे तुरंत रद्द किया जाए। दो छोटे छोटे डैम बनाए जाएं जिससे किसानों के घर, जमीन बच सकें। अगर इतना बड़ा बांध बनता है तो पांच पंचायत के गांव पूरी तरह खत्म हो जाएंगे। 60 गांव डूब प्रभावित क्षेत्र में आ जाएंगे। सरकार एक तरफ विकास की बात कर रही है, लेकिन हमारा सवाल है कि हजारों किसानों के घर, जमीन और उनके भविष्य को बर्बाद कर के आप विकास नहीं विनाश कर रहे हो। प्रभावित गांवों की महिलाएं भी विरोध में आगे हैं। घाटाखेड़ी की बसंती बाई ने कहा- क्षेत्र को हरसूद नहीं बनने देंगे
स्थानीय ग्रामीणों ने एकमत होकर बताया कि यह परियोजना उनके लिए विकास नहीं, बल्कि जीवन की बुनियाद पर प्रहार है। जिस तरह 2004 में ‘हरसूद’ को जलसमाधि दी गई थी, उसी तरह अब घाटाखेड़ी और आसपास के गांवों की जमीनें भी डूबने जा रही हैं। क्षेत्र को हरसूद नहीं बनने देंगे। अब जानें जनप्रतिनिधियों की राय…. पूर्व विधायक बोलीं- चाहे दीवारों में चुनवा दो, किसानों की लड़ाई हमेशा लड़ूंगी
इस आंदोलन में नेतृत्व की भूमिका में शामिल पूर्व विधायक ममता मीणा ने कहा कि मैं स्वयं किसान परिवार की बहू हूं और किसान हूं। मैं किसानों का दुख दर्द समझ सकती हूं। जब घर में फसल आती है, तो किसान कितना खुश होता है। सरकार के द्वारा कहा जा रहा है कि इस परियोजना से चांचौड़ा पंजाब और हरियाणा बन जाएगा। चांचौड़ा तो पहले से ही पंजाब और हरियाणा है। अभी भी किसान यहां तीन फसलें लेते हैं। हमारी मांग है कि बड़े डैम की जगह छोटे छोटे दो डैम बना दिए जाएं। चांचौड़ा की उपजाऊ जमीन को बर्बाद कर राजस्थान की बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने का सरकार प्रयास कर रही है। पूर्व सांसद लक्ष्मण सिंह ने पीएम को पत्र लिखा बोले- “यह सिर्फ किसान नहीं, साख का मुद्दा है” प्रस्तावित डैम को लेकर पूर्व सांसद लक्ष्मण सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पुनर्विचार की मांग की है। पत्र में उन्होंने इसे केवल किसानों का ही नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की राजनीतिक और सामाजिक साख का भी मुद्दा बताया है। लक्ष्मण सिंह ने पत्र में लिखा- जनता हैरान है कि जब छोटे डैम बनाकर भी वही उद्देश्य प्राप्त किया जा सकता है, तो इतने बड़े जोखिम की क्या जरूरत है? मैंने चुनाव में हार का अनुभव किया है, लेकिन इस मुद्दे को लेकर मेरी चिंता उस विजयी प्रत्याशी से भी अधिक है। विधायक प्रियंका पेंची ने ग्रामीणों से की चर्चा
पार्वती-कालीसिंध-चंबल (PKC) लिंक परियोजना को लेकर शनिवार को विधायक प्रियंका पेंची ने अपने निवास पर किसानों और क्षेत्रवासियों के साथ विशेष चर्चा की। इस दौरान कुंभराज वृहद सिंचाई परियोजना से जुड़ी कई अहम बातों पर विचार हुआ। बैठक में क्षेत्र के कई किसान और नागरिक शामिल हुए और उन्होंने अपनी चिंता, सवाल और सुझाव विधायक के सामने रखे। विधायक पेंची ने सभी किसानों को परियोजना से जुड़ी जानकारी दी और उनकी शंकाओं का जवाब भी दिया। “डैम दो ही बनेंगे, MOA में साफ लिखा है”
विधायक प्रियंका पेंची ने कहा कि ग्रामीणों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने साफ किया कि त्रिपक्षीय समझौते (MOA) में स्पष्ट रूप से दो डैम बनाए जाने का ही प्रावधान है, और यह फैसला केंद्र सरकार, मध्यप्रदेश और राजस्थान सरकार के बीच आपसी सहमति से हुआ है। विधायक ने कहा- 10-15 लोगों की टीम बनाएं, सीएम के पास मैं खुद ले चलूंगी
विधायक ने किसानों से अपील की कि वे 10-15 लोगों की एक टीम बनाएं, जिन्हें वे खुद जल संसाधन मंत्री और मुख्यमंत्री से मिलवाएंगी। उन्होंने कहा- किसी की भी बात सिर्फ कहने भर से मत मानिए, अगर कोई कुछ कहता है तो उसके पास सबूत होना चाहिए। मैं खुद इस पूरे मामले की जांच करवाऊंगी कि डैम की लोकेशन क्यों बदली गई और किसके कहने पर बदली। विपक्ष ने चांचौड़ा को डुबोने का काम किया
इस दौरान विधायक ने विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा- मुझे दुख है कि कुछ लोगों ने अपने इलाके को बचाकर चांचौड़ा को डुबोने का काम किया। चांचौड़ा ने उन्हें बहुत कुछ दिया, फिर भी उन्होंने यहां के लोगों के साथ ऐसा किया। हम सब पता करेंगे कि लोकेशन बदलने की प्रक्रिया में कौन-कौन शामिल था। अब जानें प्रशासन का पक्ष कलेक्टर बोले- पीकेसी परियोजना जिले के लिए सौगात
इस मामले को लेकर कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने कहा कि गुना जिले को एक बहुत अच्छी सौगात मिली है, जिसमें पीकेसी के तहत हमारे यहां पर चार डैम बनेंगे। इसमें कुंभराज डैम हमारा सबसे बड़ा डैम होगा। चारों डैम लगभग 7200 करोड़ में बनेंगे। किसानों के कुछ मुद्दे थे, जिनको लेकर उन्होंने रैली भी की थी। वहां प्रदर्शन भी किया था। उनको ऐसी शंका थी कि इससे ज्यादा से ज्यादा किसानों को नुकसान हो रहा है, ज्यादा से ज्यादा जमीन उनकी डूब क्षेत्र में आ जाएगी। इस मामले में जो सर्वे हुआ, जो प्राथमिक रिपोर्ट जल संसाधन विभाग ने दी है, उसके अनुसार लगभग 6.5 हैक्टेयर जमीन प्राइवेट है और दो हजार हैक्टेयर सरकारी जमीन है। उसके ऊपर ये डैम बनेगा। लगभग 16 गांव हैं, जो पूर्णतः डूब में रहेंगे और उसके अलावा कुछ गांव आंशिक रूप से प्रभावित होंगे। लेकिन अगर आप इसके फायदे देखोगे, तो वहां से 50 किलोमीटर दूर तक के किसान हैं, वहां तक पानी मिलेगा। लगभग 1.40 लाख हैक्टेयर जमीन हमारी सिंचित होगी। लगभग सवा लाख किसानों को फायदा होने वाला है। वो तीन फसल ले सकते हैं। फसलों का उत्पादन ढाई गुना तक बढ़ने वाला है। तो ये जो फायदे हैं, उन्हें भी ध्यान में रखा है।


